संत प्रेमानंद की एक झलक पाने को उमड़ी भीड़, ‘श्री राधा’ नाम से गूंज उठा गोवर्धन
राधा नाम जप का मंत्र देने वाले संत प्रेमानंद सोमवार सुबह गोवर्धन में परिक्रमा करने पहुंचे। उनके आने की खबर सुनकर सड़कों पर भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। हर ओर जय श्री राधा का उद्घोष होने लगा। पुलिस को भी भीड़ संभालने के लिए मशक्कत करनी पड़ी।
सोमवार की भोर जैसे ही गोवर्धन पर फैली, उसी क्षण पर्वतराज की तलहटी में भक्ति का सागर उमड़ पड़ा। वातावरण में ‘राधे राधे’ की ऐसी मधुर गूंज तैरने लगी मानो स्वयं गिरिराज जी भी आनंदित होकर आशीष बरसा रहे हों। कारण था भक्ति रस की जीवंत प्रतिमूर्ति संत प्रेमानंद जी महाराज के आगमन का दिव्य दृश्य।
सुबह सुबह संत प्रेमानंद जी राधाकुंड पहुंचे, जहां पहले से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें दर्शन को आतुर खड़ी थीं। जैसे ही लोगों को उनके आने का समाचार मिला, गलियां भक्तों से भर गईं। उनके स्वागत में जिस तरह पुष्पों की वर्षा हुई, वह दृश्य देखने वाला था। भक्तों की भीड़ इतनी बढ़ी कि पुलिस को व्यवस्था बनाए रखने में खासा पसीना बहाना पड़ा।
संत प्रेमानंद जी ने राधाकुंड से गिरिराज जी की पैदल परिक्रमा प्रारंभ की। मार्ग में जहां जहां वे पहुंचे, वहां भजन-कीर्तन की ध्वनि और राधे राधे के जयकारे गूंजते रहे। परिक्रमा के दौरान उन्होंने मुकुट मुखारविंद और दानघाटी मंदिर में गिरिराज जी के दर्शन कर पूजा अर्चना की।
इसके बाद वे गीता वाटिका पहुंचे, जहां राधा बाबा की चरण पादुका का दर्शन कर आशीर्वाद ग्रहण किया। पूजा अर्चना व प्रसाद ग्रहण के उपरांत वे परिक्रमा को विश्राम देकर वृंदावन के लिए रवाना हो गए। उनकी झलक पाने के लिए पूरे मार्ग में भक्तों का समुद्र उमड़ता रहा। दिव्य उपस्थिति, भक्ति से परिपूर्ण माहौल और राधे राधे की अनवरत गूंज ने गोवर्धन की तलहटी को ऐसा आध्यात्मिक स्पर्श दिया कि हर हृदय स्वयं कह उठा, श्रीराधा राधा।
