कासगंज में ड्राइवरों की कमी से खड़ी हैं निगम की बसें, सरकारी नौकरी में रुचि नहीं
कासगंज रोडवेज डिपो इन दिनों चालकों की गंभीर कमी से जूझ रहा है। विभाग द्वारा भर्ती के लिए रोजगार मेले आयोजित करने के बावजूद, संविदा पर नौकरी के लिए ड्राइवरों की रुचि नगण्य है। इसका मुख्य कारण कम वेतनमान और नौकरी की कठोर शर्तें बताई जा रही हैं। संविदा ड्राइवरों को किलोमीटर के आधार पर भुगतान किया जाता है, जिससे उनकी मासिक आय लगभग 15 से 17 हजार रुपये तक ही सीमित रह जाती है।
इसके अतिरिक्त, बस के चालान कटने या किसी प्रकार की क्षति होने पर उसकी भरपाई भी ड्राइवर को अपनी जेब से करनी पड़ती है। इन झंझटों से बचने के लिए, ड्राइवर सरकारी नौकरी की तुलना में निजी क्षेत्र में वाहन चलाना अधिक पसंद कर रहे हैं। निजी क्षेत्र में, विशेषकर शादियों और अन्य आयोजनों के सीजन में, वे कहीं अधिक कमाई कर लेते हैं, यही वजह है कि वे रोडवेज की ओर आकर्षित नहीं हो रहे हैं।
बस संचालन पर असर
चालकों की इस कमी का सीधा प्रभाव बसों के नियमित संचालन पर पड़ रहा है। डिपो के पास अपनी 69 बसों के अलावा 38 अनुबंधित बसें हैं। नियमों के अनुसार, इन सभी बसों के सुचारू संचालन के लिए कम से कम 200 चालकों की आवश्यकता है, लेकिन वर्तमान में केवल 143 चालक ही उपलब्ध हैं। इनमें से केवल 26 नियमित हैं, जबकि शेष 117 संविदा पर कार्यरत हैं। चालकों की कमी के चलते अनुबंधित बसें मार्गों पर दोहरा चक्कर लगा रही हैं, जिससे मौजूदा कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ गया है और सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी उत्पन्न हो रही हैं। हालांकि, डिपो इंचार्ज ने आश्वासन दिया है कि सभी रूटों पर बसें संचालित की जा रही हैं और यात्रियों को कोई असुविधा नहीं होने दी जाएगी।
