ट्रंप की गाजा शांति परिषद को चीन का झटका, 20 देशों की सहमति पर सवाल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता वाली गाजा शांति परिषद में शामिल होने से चीन ने साफ तौर पर मना कर दिया है। चीन का तर्क है कि कोई भी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था संयुक्त राष्ट्र के ढांचे के भीतर ही काम करनी चाहिए, और इस परिषद का संयुक्त राष्ट्र से कोई सीधा संबंध नहीं है। इस बीच, इटली ने भी इस शांति परिषद से दूरी बनाए रखने के संकेत दिए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस पहल को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि ट्रंप की इस पहल का उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र के प्रभाव को कम करना हो सकता है। कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, इस परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए एक अरब डॉलर के योगदान की आवश्यकता हो सकती है। यह परिषद गाजा में युद्धविराम के बाद की योजनाओं की निगरानी करेगी।
हालांकि, कई प्रमुख देशों ने इस परिषद में शामिल होने से इनकार कर दिया है, वहीं इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावोस में विश्व आर्थिक मंच के इतर इस परिषद के गठन समारोह में शिरकत करने की घोषणा की है। पाकिस्तान ने भी इसमें शामिल होने की पुष्टि की है। अमेरिका का दावा है कि 20 देशों ने इसमें शामिल होने के लिए सहमति जताई है, लेकिन चीन जैसी बड़ी शक्ति के इनकार ने इस दावे पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।
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