झारखंड में बच्चा चोरी का मामला फर्जी निकला, गरीबी और बदनामी के डर से माता-पिता ने गढ़ी झूठी कहानी; Hazaribagh news
झारखंड के हजारीबाग जिले में नवजात शिशु की कथित चोरी का मामला गरीबी, सामाजिक दबाव और बदनामी के डर से रची गई एक सुनियोजित साजिश निकला। पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि नवजात की कोई चोरी नहीं हुई थी, बल्कि माता-पिता ने ही सहमति से बच्चे को दूसरे व्यक्ति को सौंप दिया था। बाद में सामाजिक बदनामी से बचने के लिए उन्होंने चोरी की झूठी कहानी गढ़ी।
पुलिस के अनुसार, बहिमर गांव निवासी बेबी देवी ने हाल ही में अपने छठे बच्चे को जन्म दिया था। परिवार पहले से ही पांच बच्चों के पालन-पोषण और कमजोर आर्थिक स्थिति से जूझ रहा था। छठे बच्चे के आने से परिवार पर आर्थिक बोझ और बढ़ गया। माता-पिता के लिए नवजात की जिम्मेदारी उठाना मुश्किल हो रहा था।
पुलिस पूछताछ में बेबी देवी ने स्वीकार किया कि वह नवजात की जिम्मेदारी उठाने की स्थिति में नहीं थी। इसी कारण उसने अपनी सहेली देवंती देवी के माध्यम से अपने रिश्तेदार मीना देवी उर्फ मालती देवी को नवजात स्वेच्छा से सौंप दिया।
हालांकि, जैसे ही यह बात गांव में फैली, परिवार को सामाजिक बदनामी का डर सताने लगा। इसी डर ने साजिश का रूप ले लिया और नवजात चोरी की झूठी कहानी गढ़ दी गई। देखते ही देखते यह अफवाह फैल गई कि किसी ने बच्चा चुरा लिया है। मामला इतना बढ़ गया कि आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों ने सड़क जाम कर हंगामा किया, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई।
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया और पूरे प्रकरण की तह तक जाने के लिए छानबीन शुरू की। त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने चौपारण से मीना देवी उर्फ मालती देवी को हिरासत में लिया, जिसके पास से नवजात को सकुशल बरामद कर लिया गया।
बरामदगी के बाद बच्चे को उसकी मां बेबी देवी को सौंप दिया गया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पूरे मामले की विधिसम्मत जांच जारी है। झूठी सूचना फैलाकर माहौल बिगाड़ने, साजिश रचने और सड़क जाम जैसे घटनाक्रम में शामिल सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है।
