चंपावत में 88 वार्ड पंचों के पद रिक्त, केवल एक सीट पर हुआ उपचुनाव
चंपावत जिले में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के तहत हुए पंचायत उपचुनाव के बाद भी वार्ड पंच के 88 पद रिक्त रह गए हैं। यह स्थिति स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के पंचायती राज के मूल उद्देश्य पर सवाल खड़े करती है। विभिन्न चुनावों और उपचुनावों के बावजूद, वार्ड स्तर पर जनप्रतिनिधियों की कमी चिंता का विषय बनी हुई है।
जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका होने के बावजूद, 21वीं सदी में भी पंचायतों और उनके निवासियों में अपनी जिम्मेदारी के प्रति जागरूकता का अभाव देखा जा रहा है। इसी का परिणाम है कि चंपावत जिले में वार्ड सदस्य (पंच) के 88 पद खाली रह गए हैं। ग्राम पंचायत के गठन के लिए दो-तिहाई पंचों का चुनाव होना एक कोरम पूरा करता है, जिससे पंचायतें गठित तो हो जाती हैं, लेकिन सभी वार्डों का समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित नहीं हो पाता। सभी को नेतृत्व मिले, इसके लिए हर वार्ड में पंच का चुना जाना आवश्यक है।
चंपावत जिले के चार विकास खंडों में पंच के कुल 2286 पद हैं। मुख्य चुनावों में केवल 584 पंच ही चुने गए थे, जो लगभग 27 प्रतिशत था। रिक्त 1702 पदों के लिए 20 नवंबर को मतदान होना था। उपचुनाव में 1613 पंच निर्विरोध चुने गए, लेकिन लोहाघाट विकास खंड की सेलपेडू ग्राम पंचायत में एक पंच पद के लिए दो नामांकन होने के कारण गुरुवार को विधिवत चुनाव कराना पड़ा। इसके बावजूद, जिले में वार्ड पंच के लगभग चार प्रतिशत पद अभी भी रिक्त हैं।
सहायक जिला पंचायत राज अधिकारी, चंपावत के अनुसार, “उप चुनाव के बाद भी जिले में वार्ड सदस्य के 88 पद खाली रह गए हैं। हालांकि, दो-तिहाई बहुमत होने से जिले की सभी 312 ग्राम पंचायतें गठित हो गई हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि वार्ड सदस्यों का मुख्य कार्य वार्ड सभा की बैठकों का आयोजन व उनकी अध्यक्षता करना, खुली बैठक में वार्ड की समस्याएं उठाना, और स्थानीय विकास व कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में सहायता करना है। इसके अतिरिक्त, वार्ड में योजनाएं बनाने, लाभार्थियों की पहचान करने, योजनाओं के कार्यान्वयन में मदद करने और विकास कार्यों की निगरानी में भी उनकी अहम भूमिका होती है। जागरूकता की कमी के कारण ये महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
