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चार साल बाद चीनी निर्यात को हरी झंडी, मिलों को मिला बड़ा कोटा

By Nov 19, 2025

भारत सरकार ने चीनी निर्यात के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए चार साल बाद इसे फिर से हरी झंडी दे दी है। इस फैसले के तहत, देश भर की चीनी मिलों को निर्यात के लिए कोटा आवंटित किया गया है। बिजनौर जिले की चीनी मिलों को भी इस कोटे का लाभ मिलेगा, जिन्हें 41 हजार मीट्रिक टन से अधिक रा शुगर (बिना रिफाइन हुई चीनी) विदेशों में भेजने की अनुमति दी गई है।

सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में गन्ने की पैदावार और चीनी उत्पादन में हुई बंपर वृद्धि के कारण चीनी के दाम गिरने लगे थे, जिसका सीधा असर किसानों को गन्ने के भुगतान पर पड़ रहा था। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए, भारत सरकार ने पहले रा शुगर के निर्यात पर रोक लगा दी थी और मिलों को एथेनॉल उत्पादन की ओर प्रोत्साहित किया था। एथेनॉल उत्पादन से चीनी का उत्पादन करीब 15 प्रतिशत तक कम हो जाता है, जिससे बाजार में आवक नियंत्रित होती है।

हालांकि, रा शुगर निर्यात पर रोक लगने से चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति और किसानों के भुगतान पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा था। अब सरकार के इस नए फैसले से चीनी मिलों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। रा शुगर का निर्यात बढ़ने से न केवल घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता कम होगी, बल्कि इसकी मांग और दाम बढ़ने की भी संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति सुधरेगी और वे किसानों को गन्ने का भुगतान समय पर कर पाएंगे। यह कदम चीनी उद्योग को पुनर्जीवित करने और किसानों की आय को स्थिर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। जिले को मिला यह बड़ा निर्यात कोटा स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी सकारात्मक संकेत है।

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