CBI ने WAPCOS प्रोजेक्ट मैनेजर को 10 लाख की रिश्वतखोरी में किया गिरफ्तार, देशव्यापी छापेमारी जारी
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने जल, विद्युत और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में कार्यरत केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) वाप्कोस (WAPCOS) लिमिटेड के परियोजना प्रबंधक पंकज दुबे को 10 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई लखनऊ में की गई, जहां ठेकेदार बबलू सिंह यादव समेत कुल पांच लोगों को पकड़ा गया। यह मामला भुवनेश्वर में निर्माण कार्यों के ठेके दिलाने और स्वीकृति पत्र जारी करने के बदले अवैध वसूली से जुड़ा है, जिसकी देशव्यापी जांच चल रही है। इस घटना से सरकारी परियोजनाओं में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की आवश्यकता फिर से उजागर हुई है, क्योंकि ऐसी गतिविधियां सीधे तौर पर सार्वजनिक धन और विकास की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं।
सीबीआई की कार्रवाई और गिरफ्तारियां
सीबीआई ने भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने के बाद अपना जाल बिछाया था। पंकज दुबे पर आरोप है कि वह भुवनेश्वर स्थित वाप्कोस कार्यालय में निविदाएं जारी करने, स्वीकृति पत्र (LOA) देने और ठेकेदारों के बिलों के भुगतान को मंजूरी देने के लिए जिम्मेदार थे और इन्हीं कार्यों के लिए अवैध वसूली कर रहे थे। गाजीपुर निवासी ठेकेदार बबलू सिंह यादव, जो एम/एस एकाना एंटरप्राइजेज का संचालन करते हैं, ने रायगढ़ा स्थित इमली प्रसंस्करण इकाई के निर्माण के लिए जारी निविदा में भाग लिया था और ठेका हासिल करने के लिए पंकज दुबे के साथ डील की थी। सीबीआई ने बबलू सिंह के चालक शुभम कुमार पाल, राजेश कुमार सिंह और राहुल वर्मा को भी गिरफ्तार किया है। सीबीआई लखनऊ की एंटी करप्शन ब्रांच ने पंकज दुबे समेत आठ नामजद और अन्य अज्ञात लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की है।
रिश्वतखोरी का तरीका और लेनदेन
जांच में सामने आया है कि बबलू सिंह की फर्म को 13 जनवरी को लगभग 11.81 करोड़ रुपये का रायगढ़ा इमली प्रसंस्करण इकाई निर्माण का ठेका मिला था और उसी दिन स्वीकृति पत्र भी जारी हुआ था। आरोप है कि इस ठेके के लिए लगभग 13 प्रतिशत कमीशन की डील हुई थी, जिसमें से छह प्रतिशत का अग्रिम भुगतान हवाला के माध्यम से वाराणसी में होना था। बाद में, 25 लाख रुपये गाजीपुर से लखनऊ पहुंचाए गए थे, जो राहुल वर्मा को सौंपे जाने थे। सीबीआई ने लखनऊ में गोमतीनगर विस्तार, सुशांत गोल्फ सिटी और आशियाना क्षेत्र स्थित आरोपितों के ठिकानों समेत गाजीपुर, देवरिया और भुवनेश्वर में एक दर्जन से अधिक स्थानों पर छापेमारी की है।
काली कमाई का प्रबंधन और अन्य आरोपी
आरोप है कि पंकज दुबे ठेकों में धांधली के बदले बी भूटिया और अभिषेक ठाकुर के जरिए वसूली करता था। ठेका दिलाने के लिए निविदा राशि का चार से छह प्रतिशत तक, स्वीकृति पत्र जारी करने के लिए चार प्रतिशत और बिल पास करने के लिए तीन प्रतिशत की वसूली की जाती थी। अभिषेक ठाकुर ठेकेदार से डील करता था, जबकि बी भूटिया की भूमिका निविदा प्रक्रिया और बिलों के अनुमोदन में गड़बड़ी करने की थी। सीबीआई की जांच में यह भी सामने आया है कि परियोजना प्रबंधक पंकज दुबे का भाई पवन दुबे काली कमाई को देवरिया में संपत्ति खरीदने और निर्माण कार्यों में लगाने में सहयोग करता था। काली कमाई के प्रबंधन में पंकज का करीबी राहुल वर्मा भी शामिल था। बिचौलिया गोपाल मिश्रा उत्तर प्रदेश और दिल्ली एनसीआर के ठेकेदारों की व्यवस्था करता था तथा परियोजना संबंधी जानकारियां देकर उनकी डील पंकज दुबे से कराता था, जिसके बदले उसे निविदा राशि का लगभग एक प्रतिशत हिस्सा मिलता था।
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