स्लीपर बसों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए केबिन और स्लाइडर हटेगा, नई गाइडलाइंस जारी
यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए, परिवहन आयुक्त ने स्लीपर बसों के संचालन में बड़े बदलावों का आदेश दिया है। इसके तहत, अब स्लीपर बसों में ड्राइवर केबिन के लिए पार्टीशन डोर और स्लीपर बर्थ पर लगे स्लाइडर को हटाया जाएगा। यह निर्णय यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है।
सभी स्लीपर बसों में अग्निशमन निवारण यंत्रों की स्थापना के लिए एक महीने का समय दिया गया है। इस अवधि के बाद, जो बसें इन मानकों का पालन नहीं करेंगी, उन्हें सीज कर दिया जाएगा। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्लीपर बसों में हुई दुर्घटनाओं में हताहतों की संख्या पर चिंता व्यक्त की थी, जिसके बाद यह कदम उठाया गया है। परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने इन निर्देशों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सभी क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों (आरटीओ) और सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों (एआरटीओ) को पत्र जारी किया है।
राज्य परिवहन प्राधिकरण के नए नियमों के अनुसार, स्लीपर बसों के पंजीकरण के समय दरवाजे की जगह, डाइमेंशन, आपातकालीन द्वार, रूफ हैच और ले-आउट ड्राइंग जमा करना अनिवार्य होगा। इसके अतिरिक्त, स्लीपर बस बॉडी निर्माण कंपनियों की मान्यता की वैधता की भी जांच की जाएगी। मानक उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।
यह कदम केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी द्वारा की गई घोषणा के अनुरूप है। उन्होंने कहा था कि आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए स्लीपर कोच बसों का निर्माण केवल अधिकृत वाहन कंपनियों और केंद्र से मान्यता प्राप्त कारखानों में ही होगा। मौजूदा बसों में आग का पता लगाने वाली प्रणाली, आपातकालीन निकास के लिए हथौड़ा, आपातकालीन रोशनी और चालक थकान संकेतक लगाना आवश्यक होगा। पिछले छह महीनों में स्लीपर कोचों से जुड़ी आग की छह घटनाओं में 145 लोगों की जान जा चुकी है।
