यूपी विधानसभा में ब्रजेश पाठक का सपा पर पलटवार, स्वास्थ्य सेवाओं पर ‘UP politics news’ गरमाई
उत्तर प्रदेश की राजनीति में सोमवार को विधानसभा और विधान परिषद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी (सपा) पर स्वास्थ्य सेवाओं और राजनीतिक मुद्दों को लेकर जमकर पलटवार किया। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है, और जनता बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की उम्मीद कर रही है।
विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान सपा सदस्यों द्वारा प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल उठाने पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने अवधी भाषा में अपनी बात रखते हुए कहा कि प्रदेश सरकार नागरिकों को उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं दे रही है। पाठक ने सपा सदस्यों को चेतावनी दी कि अगर वे राजनीतिक बातें करेंगे, तो वह 2017 से पहले के मुद्दों को लेकर ‘रायता फैला देंगे’। उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं की समस्याओं पर भी सपा को घेरा, याद दिलाया कि उनकी सरकार में मानदेय 1000 रुपये था, जिसे भाजपा सरकार ने 2000 रुपये किया। पाठक ने सपा के 2027 में भी सत्ता में न आने का दावा करते हुए कहा कि आशा कार्यकर्ता उनके विभाग की रीढ़ हैं और उनके लिए छुट्टी की व्यवस्था भी की गई है। इस दौरान ‘UP politics news’ में गरमाहट साफ महसूस की गई।
वहीं, विधान परिषद में सपा द्वारा काम रोको प्रस्ताव के तहत प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को बदहाल बताए जाने पर नेता सदन उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी जोरदार प्रतिवाद किया। मौर्य ने कोरोना महामारी के दौरान वैक्सीन के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सपा नेता अखिलेश यादव ने पहले इसका विरोध किया, लेकिन बाद में चुपके से वैक्सीन लगवा ली। उन्होंने राहुल गांधी का भी जिक्र किया और कहा कि वे इसका फोटो तक उपलब्ध करा सकते हैं। सपा सदस्य मुकुल यादव ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्हें भी वह फोटो दिखाया जाए, क्योंकि उन्होंने और उनके नेता ने वैक्सीन नहीं ली है।
केशव प्रसाद मौर्य ने सरकार की स्वास्थ्य प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि सरकार गरीबों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने के लिए संवेदनशील है। आयुष्मान भारत और राज्य की योजनाओं के तहत बड़ी आबादी को मुफ्त या सस्ती इलाज सुविधा मिल रही है। उन्होंने ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ के मंत्र को दोहराते हुए कहा कि कल्याणकारी योजनाएं बिना किसी भेदभाव के सभी नागरिकों के लिए हैं। प्रदेश में डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, और जिन जिला अस्पतालों का मेडिकल कॉलेजों में विलय हुआ है, उनके अलावा पीएचसी, सीएचसी और अन्य जिला अस्पतालों में सुविधाएं पहले से बेहतर हुई हैं। जहां एमआरआई या सीटी स्कैन के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं, वहां निजी क्षेत्र की साझेदारी से सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
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