मतदाता सूची सुधार में बीएलओ की चुनौती: एसआईआर फॉर्म भरने में मतदाताओं की अनिश्चितता बनी बाधा
लखीमपुर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) की रफ्तार इस बार कागजों में नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत में परखी जा रही है। बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) घर-घर जाकर मतदाताओं के नाम सूची में जोड़ने, हटाने या सुधारने के लिए फार्म बांट रहे हैं। हालांकि, मतदाताओं की अनिश्चितता और लापरवाही इस अभियान की सबसे बड़ी बाधा बनकर उभरी है। चार दिसंबर अंतिम तिथि होने के बावजूद, कई लोग फार्म वापस करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं, जिससे बीएलओ परेशान हैं।
द्वारिकापुरी की बीएलओ अनामिका त्रिपाठी ने बताया कि 1235 में से 600 एसआईआर फार्म बांटने के बावजूद अब तक केवल 428 फार्म ही वापस आए हैं। लोग फार्म ले तो लेते हैं, लेकिन बार-बार याद दिलाने पर भी उन्हें जमा नहीं करते। इस समस्या से निपटने के लिए अब घर-घर जाकर सीधे फार्म भरवाने की योजना बनाई जा रही है। इसी तरह, बीएलओ नरेश तिवारी भी कमोबेश ऐसी ही स्थिति का सामना कर रहे हैं। उन्होंने 1123 फार्म बांटे, जिनमें से केवल 400 ही वापस मिले। उनकी चिंता का मुख्य कारण यह है कि लोग यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि वे शहर के मतदाता के तौर पर पंजीकृत होना चाहते हैं या गांव के। यही दुविधा फार्म भरने और जमा करने में आड़े आ रही है।
अभियान के दौरान सामने आई सबसे गंभीर समस्या ‘दोहरे मतदाता’ हैं। कई लोग गांव और शहर दोनों जगह अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज करा चुके हैं और दोनों जगहों से वोटर आईडी भी बनवा चुके हैं। अब एसआईआर के दौरान उनसे यह पूछा जा रहा है कि वे वास्तव में किस स्थान के स्थायी निवासी हैं और कहां का मतदाता बनना चाहते हैं। इस उलझन के कारण सैकड़ों लोग फार्म भरने से कतरा रहे हैं, जो मतदाता सूची को सही करने के अभियान में एक बड़ी रुकावट बन रही है।
निर्वाचन अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फार्म में किसी भी प्रकार की गलत, भ्रामक या अपुष्ट जानकारी न भरी जाए। अपर जिलाधिकारी (एडीएम एफआर) नरेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि बीएलओ को दी गई जानकारी का सत्यापन 2003 की मतदाता सूची से किया जाता है। कोई भी गलत तथ्य भविष्य में मतदाता के लिए गंभीर समस्या खड़ी कर सकता है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि फार्म पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य है, अन्यथा फार्म मान्य नहीं होगा।
बीएलओ पर फार्म बांटने और समय पर वापस जमा कराने का दोहरा दबाव है। समय कम और क्षेत्र बड़ा होने के कारण, खासकर जब लोग फार्म जमा करने में देरी कर रहे हों, तो बीएलओ को रोजाना कई चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। अधिकारियों ने मतदाताओं से अपील की है कि वे 4 दिसंबर से पहले हर हाल में फार्म जमा कर दें। जिन लोगों को फार्म भरने में कठिनाई हो रही है, वे सहायता के लिए ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव, सभासद या राजनीतिक दलों के बूथ एजेंटों से संपर्क कर सकते हैं।
एसआईआर फार्म नई मतदाता सूची का आधार हैं। जो लोग इन फार्मों को नहीं भरेंगे, उनके नाम मौजूदा सूची से हटाए जा सकते हैं। इसलिए, यह अभियान केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि मतदाता के रूप में बने रहने का अंतिम अवसर है। वर्तमान में सबसे बड़ी चुनौती लोगों की अनिश्चितता को दूर करना और बीएलओ के प्रयासों को सफल बनाना है, जिस पर आगामी मतदाता सूची की गुणवत्ता पूरी तरह निर्भर करेगी।
