बांग्लादेश में बड़ा राजनीतिक संकट: आवामी लीग ने चुनाव को किया खारिज, भारत के लिए बढ़ी चिंता
बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता अपने चरम पर है। शेख हसीना की आवामी लीग ने आगामी चुनावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। पार्टी ने अंतरिम सरकार (मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली) पर ‘हत्यारा-फासीवादी’ होने का आरोप लगाया है और कहा है कि उनके नियंत्रण में निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराना असंभव है।
आवामी लीग का यह रुख देश के पहले से ही खंडित राजनीतिक परिदृश्य में एक नया मोड़ है। यूनुस सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी को 12 फरवरी 2026 को होने वाले अगले आम चुनावों में भाग लेने से रोक दिया है। 20 साल तक देश पर शासन करने वाली पार्टी को बाहर करना, बिना किसी राजनीतिक सुरक्षा वाल्व के समाज पर दबाव बढ़ा रहा है।
यह गहराता अविश्वास भारत के पड़ोस में एक बड़े संकट का रूप ले रहा है। भारत के लिए चिंता की बात यह है कि यूनुस सरकार अब हसीना के प्रत्यर्पण के मुद्दे का उपयोग भारत को घेरने के लिए कर रही है। हसीना को पिछले साल सत्ता से बेदखल किए जाने के बाद से वह भारत में रह रही हैं।
सबसे गंभीर बात यह है कि बांग्लादेश अब भारत विरोधी गुट की ओर झुक रहा है। बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन ने हाल ही में पाकिस्तान की उस पहल का समर्थन किया, जिसमें ढाका, बीजिंग और इस्लामाबाद को मिलाकर एक नया त्रिपक्षीय समूह बनाने की बात कही गई थी। यह कदम भारत के लिए रणनीतिक रूप से खतरनाक है, क्योंकि यह संकेत देता है कि बांग्लादेश भारत के हितों के विपरीत एक धुरी में शामिल होने को तैयार है।
