शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही: एक अधिकारी के भरोसे दो जिलों का भविष्य, लाखों छात्रों की पढ़ाई खतरे में
महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी, जिन्हें राज्य में शिक्षा हब माना जाता है, वहां शिक्षा विभाग की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। महेंद्रगढ़ के डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर सुनील दत्त पहले से ही तीन महत्वपूर्ण पद संभाल रहे थे – डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर (DEO), डिस्ट्रिक्ट एलिमेंट्री एजुकेशन ऑफिसर (DEO), और डाइट प्रिंसिपल। अब उन्हें रेवाड़ी के तीन और पदों का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया है। इसका मतलब है कि अब एक ही अधिकारी दो जिलों के छह महत्वपूर्ण पदों को संभालेगा। रेवाड़ी में ये पद जुलाई से खाली थे, जबकि महेंद्रगढ़ में जून से ही नेतृत्व एक ही व्यक्ति पर निर्भर है।
इस अत्यधिक कार्यभार के कारण सरकारी स्कूलों में निरीक्षण, मिड-डे मील की गुणवत्ता जांच और शिक्षण की निगरानी पूरी तरह से ठप हो गई है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जब एक व्यक्ति पर दो जिलों का प्रशासनिक बोझ होता है, तो शिक्षण की गुणवत्ता और फील्ड वर्क पर असर पड़ना तय है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि जिन जिलों ने राज्य को सबसे मजबूत शिक्षा मॉडल दिया है, उन्हें ही नेतृत्वविहीन छोड़ दिया गया है। इससे लाखों बच्चों की पढ़ाई और बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी खतरे में पड़ गई है।
नारनौल में DEO संतोष सिंह के रिटायर होने के बाद सुनील दत्त को DEO और DEEO का चार्ज मिला। अब रेवाड़ी में भी तीन अहम पदों की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। राज्य में HES-1 रैंक के अधिकारियों की कमी एक बड़ी समस्या है, जिसके कारण कई जिलों में पद खाली हैं। विभाग अतिरिक्त प्रभार देकर इस कमी को छिपाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इसका सीधा असर छात्रों के भविष्य पर पड़ रहा है।
