निर्यात तत्परता सूचकांक में यूपी की बड़ी छलांग, चौथे स्थान पर पहुंचा Uttar Pradesh
निर्यात के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। नीति आयोग द्वारा जारी निर्यात तत्परता सूचकांक (ईपीआई)-2024 में राज्य समग्र रैंकिंग में चौथे स्थान पर पहुंच गया है, जो पिछले सूचकांक (ईपीआई-2022) में सातवें स्थान पर था। इस तीन पायदान की छलांग के पीछे राज्य सरकार की नई निर्यात नीति और किए गए संरचनात्मक सुधारों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। महाराष्ट्र, तमिलनाडु और गुजरात ने शीर्ष तीन स्थान हासिल किए हैं।
समुद्री तट न होने के बावजूद उत्तर प्रदेश का चौथे स्थान पर पहुंचना राज्य सरकार के प्रयासों को दर्शाता है। भू-आबद्ध राज्यों की रैंकिंग में यूपी ने पहला स्थान प्राप्त किया है, जो पिछले सूचकांक में दूसरा था। यह सफलता राज्य सरकार द्वारा निर्यातकों के लिए किए गए नीतिगत समर्थन और संरचनात्मक सुधारों का परिणाम है, जिससे निर्यातकों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है।
नीति आयोग ने इस रैंकिंग के लिए एक्सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, बिजनेस इकोसिस्टम, पॉलिसी एंड गवर्नेंस और एक्सपोर्ट परफॉर्मेंस जैसे चार प्रमुख स्तंभों के तहत 13 उप-स्तंभों और 70 संकेतकों का मूल्यांकन किया। पिछले तीन वर्षों के निर्यात प्रदर्शन के आधार पर यह मूल्यांकन किया गया। निर्यात विभाग के अधिकारियों के अनुसार, निर्यात पोर्टफोलियो का विस्तार, नए बाजारों तक पहुंच, लॉजिस्टिक सपोर्ट सिस्टम का विकास और उद्योग-अनुकूल नीतियों ने इस सफलता में योगदान दिया है। ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना और सड़क कनेक्टिविटी में सुधार का भी लाभ मिला है।
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार शो का आयोजन भी प्रदेश के निर्यातकों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ है। इन आयोजनों से एमएसएमई और पारंपरिक कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से सीधे जुड़ने का अवसर मिला, जिससे निर्यात आर्डरों में वृद्धि हुई। हथकरघा, हस्तशिल्प, खाद्य-प्रसंस्करण, चमड़ा, फार्मा और एग्री-बेस्ड उत्पादों को नई पहचान मिली है।
भू-आबद्ध राज्य होने की चुनौतियों के बावजूद, उत्तर प्रदेश निर्यात प्रोत्साहन नीति के तहत निर्यातकों को विभिन्न सुविधाएं प्रदान कर रहा है। इनमें माल भाड़ा व्यय, मेला प्रदर्शनी में प्रतिभाग, कूरियर चार्जेज, वायुयान भाड़ा व्यय, गुणवत्ता प्रमाणीकरण, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्डिंग शुल्क की प्रतिपूर्ति और निर्यात अवसंरचना विकास के लिए प्रतिपूर्ति जैसी सुविधाएं शामिल हैं। ये प्रोत्साहन रैकिंग में सुधार का आधार बने हैं।
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