जनगणना 2027 में बड़ा बदलाव: अब देना होगा ‘प्रवास का कारण’, सरकार ने बताया क्यों
पीटीआई, नई दिल्ली। जनगणना 2027 में वर्तमान निवास पर रहने की अवधि और प्रवास के कारण से संबंधित प्रश्न भी शामिल होंगे। लोकसभा में एक लिखित उत्तर में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद नित्यानंद राय ने बताया कि जनगणना में प्रत्येक व्यक्ति की जानकारी उस स्थान पर एकत्र की जाती है जहां वह गणना अवधि के दौरान पाया जाता है।
मंत्री एक सदस्य के इस प्रश्न का उत्तर दे रहे थे कि क्या जनगणना-2027 के दौरान प्रवासी श्रमिकों और अस्थायी निवासियों की गणना के लिए कोई विशेष प्रविधान किए जा रहे हैं और क्या इसके लिए अलग से डाटा संग्रह प्रक्रिया प्रस्तावित है।
मंत्री ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के जन्म स्थान और अंतिम निवास स्थान के आधार पर प्रवासन डेटा एकत्र किया जाता है। उन्होंने कहा कि जनगणना में वर्तमान निवास पर रहने की अवधि और प्रवास के कारण की जानकारी भी एकत्र की जाती है। जनगणना के लिए प्रश्नावली को केंद्र सरकार द्वारा क्षेत्रीय कार्य करने से पहले आधिकारिक राजपत्र के माध्यम से अधिसूचित किया जाता है।
सरकार ने मंगलवार को संसद को बताया कि 2024 में शुरू की गई संदिग्धों की एक रजिस्ट्री ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों को साइबर अपराधों में शामिल होने के संदेह में आठ हजार करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन को अस्वीकार करने में मदद की। इस दौरान 18 लाख से अधिक संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान की और 24.67 लाख संदिग्ध खातों को चिह्नित किया।
गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने एक लिखित उत्तर में कहा कि साइबर अपराधियों की पहचान करने वालों की संदिग्ध रजिस्ट्री आइ4सी (भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र) द्वारा बैंकों और वित्तीय संस्थानों के सहयोग से 10 सितंबर 2024 को शुरू की गई है।
केंद्र सरकार अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के कारण देश के निर्यात पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए बहुआयामी रणनीति अपना रही है, जिसमें पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते के लिए अमेरिका के साथ गहन बातचीत भी शामिल है।
एक लिखित उत्तर में वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि उम्मीद है कि इन उपायों से भारत के व्यापार संबंधों में विविधता और लचीलापन भी बढ़ेगा। उन्होंने आगे कहा कि सरकार यूरोपीय संघ, पेरू, चिली, न्यूजीलैंड और ओमान के साथ पारस्परिक रूप से लाभकारी मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के लिए भी बातचीत कर रही है।
केंद्र सरकार ने संसद को सूचित किया कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के पात्र निवासियों को वास्तविक द्वीपवासियों के लिए निर्धारित लाभ मिल रहे हैं, भले ही उनके पास द्वीपवासी कार्ड न हो। यह स्पष्टीकरण स्थानीय सांसद बिष्णु पद रे द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में आया, जिसमें उन्होंने पुन: सर्वेक्षण कराने और छूटे हुए वास्तविक द्वीपवासियों को द्वीपवासी कार्ड जारी करने के अपने अनुरोध के संबंध में विवरण मांगा था।
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