सीमावर्ती जयनगर को बड़ा झटका: गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे ने रोकी फोरलेन की राह, अब नए सिरे से बनेगी योजना
सीमावर्ती जयनगर जयनगर के लोगों के लिए एक निराश करने वाली खबर है। जयनगर दरभंगा राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या 527बी (पुराना 105) को फोरलेन बनाए जाने की योजना फिलहाल टाल दी गई है। गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे निर्माण को लेकर इस योजना पर पानी फिर गया है।
जानकारी के अनुसार दरभंगा से जयनगर तक कुल 53 किमी एनएच 527बी को फोरलेन बनाया जाना था। मौजूदा स्थिति यह है कि जयनगर से बनवारी लगभग 38 किलोमीटर एनएच को फोरलेन करने की योजना नए सिरे से तैयार की जाएगी। जबकि दरभंगा के दिल्ली मोड़ से करीब 15 किलोमीटर बनवारी गांव तक एनएच 527बी को फोरलेन निर्माण के लिए विभाग द्वारा टेंडर की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
लेकिन बनवारी से जयनगर एनएच चौड़ीकरण में बाधा के रूप में गोरखपुर सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे सामने आ रही है। जयनगर चैंबर ऑफ कॉमर्स के महासचिव अनिल बैरोलिया समेत सामाजिक व बुद्धिजीवियों ने सीमावर्ती क्षेत्र जयनगर को उपेक्षित करने का आरोप लगाया है। कभी चावल एवं एल्यूमिनियम बर्तन उद्योग के लिए मशहूर रहा जयनगर भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अवस्थित है। यह पूर्व मध्य रेलवे का टर्मिनल स्टेशन भी है। यहां सशस्त्र सीमा बल 48वीं बटालियन का मुख्यालय एवं अंतरराष्ट्रीय नेपाली रेलवे स्टेशन भी है। बावजूद इसके जयनगर को फोरलेन व एक्सप्रेसवे जैसे महत्वपूर्ण सड़कों से नहीं जोड़ना दुर्भाग्यपूर्ण माना जा रहा है।
आम लोगों की मानें तो जयनगर एवं सीमावर्ती क्षेत्र के विकास के लिए जयनगर को फोरलेन और एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाना आवश्यक है। भारत सरकार को इस बात को संज्ञान में लेकर पहल करने की जरूरत है। विभाग ने जयनगर दरभंगा एनएच 527 बी करीब 53 किलोमीटर फोरलेन के सौगात के साथ तीन जगहों पर बाईपास निकाला था। लेकिन गोरखपुर सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के निर्माण को लेकर इस योजना को ठंडे बस्ते में रख कर नई तरीके से योजना बनाया जाएगा। कार्यपालक अभियंता राज किशोर कुमार ने बताया कि जयनगर दरभंगा के करीब 38 किलोमीटर सड़क चौड़ीकरण के लिये नए तरीके से योजना तैयार की जाएगी।
