भोपाल में गुंडागर्दी पर पुलिस का चाबुक, आरोपियों का जुलूस निकालकर दिया सख्त संदेश
भोपाल पुलिस ने शहर में कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले अपराधियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। पिछले तीन दिनों में मिसरोद, कटारा हिल्स और गांधीनगर थाना क्षेत्रों में हुई तोड़फोड़, गुंडागर्दी और मारपीट की घटनाओं के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अलग-अलग मामलों में कुल 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन अपराधियों का पुलिस ने सार्वजनिक रूप से जुलूस निकालकर यह संदेश दिया है कि शहर में किसी भी प्रकार की अराजकता और उपद्रव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पुलिस की इस कार्रवाई से आम जनता में सुरक्षा की भावना प्रबल हुई है और अपराधियों में खौफ का माहौल है। जिन क्षेत्रों में इन वारदातों को अंजाम दिया गया था, पुलिस ने वहीं से आरोपियों का जुलूस निकाला, ताकि सबक सिखाया जा सके।
पहली घटना कटारा हिल्स थाना क्षेत्र में हुई, जहाँ सेज यूनिवर्सिटी के छात्रों के बीच हुए विवाद ने मारपीट का रूप ले लिया। अभिषेक राजपूत ने अपने साथियों के साथ मिलकर योगी और उसके दोस्तों से मारपीट की। पीड़ितों की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत जेल भेज दिया है।
इसी मारपीट का बदला लेने के इरादे से योगी और उसके करीब 20 साथियों ने 18 नवंबर की रात सेज माइलस्टोन के पास एक कैफे में घुसकर लाठी-डंडों और तलवारों से जमकर तोड़फोड़ की। इस मामले में पुलिस ने पांच नामजद सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ मारपीट और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने ओम सिंह गहरवार उर्फ ऋषभ, अभिलाष मारन, योगी उर्फ योगेन्द्र अमराते, देवांश सिंह और वासु गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है। इनमें से अभिलाष को छोड़कर बाकी सभी आरोपी कॉलेज छात्र हैं। पुलिस ने मिसरोद क्षेत्र से इन आरोपियों का जुलूस निकाला और अन्य फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है।
एक अन्य घटना में, गांधीनगर थाना क्षेत्र के गोंडीपुरा में सड़क पर साइड देने के मामूली विवाद के बाद बाइक सवारों ने कार और अन्य बाइकों में तोड़फोड़ की थी। पुलिस ने इस मामले में आदतन बदमाश अनस खान, आरिश खान, मोहम्मद अदनान केडी उर्फ फैज और मोहम्मद वाहिद को गिरफ्तार किया है। ये सभी शाहजहांनाबाद क्षेत्र के रहने वाले हैं और इनका आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शहर में शांति और सुरक्षा बनाए रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस तरह की कार्रवाई से अपराधियों को यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि वे कानून से ऊपर नहीं हैं और उनकी किसी भी प्रकार की गुंडागर्दी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
