भिवाड़ी में 6 दिन से दमघोंटू हवा, AQI 300 पार, सांस लेना हुआ दूभर
राजस्थान के भिवाड़ी कस्बे में वायु प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। पिछले छह दिनों से हवा की गुणवत्ता लगातार बेहद खराब श्रेणी में दर्ज की जा रही है, जिससे स्थानीय निवासियों का जीवन दूभर हो गया है। आंखों में जलन, गले में संक्रमण और खांसी जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से लोग परेशान हैं।
सूत्रों के अनुसार, खुले में कचरा जलाया जाना, निर्माण सामग्री का सड़कों पर बिखरा रहना, सड़कों से उड़ती धूल और वाहनों व औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं। इन कारणों पर अंकुश लगाने में प्रशासन की विफलता स्थिति को और गंभीर बना रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सड़क मरम्मत और धूल नियंत्रण जैसे आवश्यक उपाय किए गए होते, तो स्थितियां इतनी भयावह न होतीं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के रविवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, भिवाड़ी लगातार राजस्थान का सबसे प्रदूषित शहर बना हुआ है। जहां अलवर का एक्यूआई 101 और भरतपुर का 245 दर्ज किया गया, वहीं भिवाड़ी का औसत एक्यूआई 336 रहा। विशेष रूप से औद्योगिक क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सबसे खराब पाई गई, जहां एक्यूआई 373 दर्ज हुआ। वसुंधरा नगर क्षेत्र का एक्यूआई भी 299 के साथ खराब श्रेणी में रहा।
सीपीसीबी के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि 10 नवंबर से 23 नवंबर के बीच केवल 17 नवंबर को ही एक्यूआई 260 पर पहुंचा था, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी से नीचे था। लेकिन यह राहत केवल एक दिन की साबित हुई। 18 नवंबर को एक्यूआई पुनः बढ़कर 359 हो गया और तब से लेकर 23 नवंबर तक यह लगातार 300 से ऊपर बना हुआ है, जो ‘गंभीर’ श्रेणी के करीब है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रदूषण का स्तर यही बना रहा, तो स्वास्थ्य जोखिम और बढ़ सकते हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से प्रदूषण नियंत्रण के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है। उनकी मांग है कि सड़कों पर नियमित पानी का छिड़काव, निर्माण सामग्री को ढककर रखना, खुले में कचरा जलाने पर सख्त रोक और औद्योगिक इकाइयों पर कड़ी निगरानी जैसे उपाय प्राथमिकता के आधार पर लागू किए जाएं, ताकि ‘दमघोंटू’ हवा से निजात मिल सके।
