0

शिवली में भागवत कथा: गुरु-मित्र से छल का मिलता है दंड, आचार्य ने बताया सुदामा चरित्र का महत्व

By Feb 14, 2026

कानपुर के शिवली क्षेत्र स्थित बैरी दरियाव गांव के सांवरा श्याम मंदिर में आयोजित भागवत कथा के अंतिम दिन आचार्य ने सुदामा चरित्र का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने श्रोताओं को बताया कि निष्काम कर्मयोगी और भगवान के परमभक्त होने के बावजूद भी सुदामा को बाल्यावस्था में अपने मित्र श्रीकृष्ण से छिपाकर गुरुमाता के दिए चने खाने के कारण दरिद्रता का दंश झेलना पड़ा था। यह कथा गुरु और मित्र से छल न करने तथा निस्वार्थ प्रेम के महत्व को दर्शाती है।

आचार्य ने गृहस्थ जीवन में तनाव से बचने के लिए संतोषी बनने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुदामा कोई दीनहीन ब्राह्मण नहीं, बल्कि निष्काम कर्मयोगी थे, जिनकी भगवान कृष्ण के साथ मित्रता पूर्णतः निस्वार्थ थी। सुदामा ने कभी भी कृष्ण से सुख-साधन या आर्थिक लाभ की कामना नहीं की।

हालांकि, अपनी पत्नी के आग्रह पर जब वे द्वारिकापुरी पहुंचे, तो उनकी पत्नी द्वारा दी गई तंदुल की पोटली ने सारी हकीकत बयां कर दी। भगवान श्रीकृष्ण ने बिना मांगे ही सुदामा को सब कुछ प्रदान कर दिया, जिससे उनकी दरिद्रता दूर हुई। इस प्रसंग के माध्यम से आचार्य ने श्रोताओं को श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता से सीख लेने और गुरु-मित्र से कभी छल न करने का संदेश दिया।

भागवत कथा के साथ ही मंदिर परिसर में चल रहे श्री श्याम यज्ञ का भी समापन हुआ। यज्ञाचार्य लव द्विवेदी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूर्णाहुति संपन्न कराई। इस अवसर पर मंदिर के महंत राजेश त्रिवेदी, परीक्षित प्रेम चंद्र त्रिवेदी सहित राजन, सुनील, पूनम, संगीता, हरिओम, शिव स्वरूप मोनू, बबलू, अभिनव जैसे बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

About

Journalist covering latest updates.

साझा करें