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भगत सिंह के इंकलाब का बीज आजमगढ़ की माटी में जीवित: प्रो. जगमोहन सिंह

By Dec 1, 2025

शहीद भगत सिंह के भांजे और शहीद भगत सिंह शताब्दी फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. जगमोहन सिंह ने आजमगढ़ में कहा है कि महान क्रांतिकारी भगत सिंह के इंकलाब का बीज आज भी आजमगढ़ की माटी में जीवित है। उन्होंने भगत सिंह को एक ऐसी विचारधारा बताया जो आज भी युवाओं को प्रेरित करती है। प्रो. जगमोहन सिंह ने आजमगढ़ की धरती को क्रांतिकारियों की धरती बताते हुए युवाओं से भगत सिंह के सपनों को साकार करने का आह्वान किया।

यह बात भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) द्वारा आजमगढ़ में आयोजित पार्टी के बलिदान एवं संघर्षों के 100 साल मनाने के अवसर पर कही गई। कार्यक्रम के दूसरे दिन नेहरू हॉल में नौजवान भारत सभा की शताब्दी पर “भगत सिंह के विचारों की प्रासंगिकता” विषय पर एक राष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी की अध्यक्षता कॉमरेड हरिमंदिर पाण्डेय ने की, जबकि संचालन भाकपा जिला सचिव जितेंद्र हरि पाण्डेय ने किया।

गोष्ठी के मुख्य वक्ता प्रो. जगमोहन सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भगत सिंह का विचार आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने शिब्ली मंजिल, राहुल जन्म स्थान पंदहा और निजामाबाद गुरुद्वारे का उल्लेख करते हुए आजमगढ़ के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया। प्रो. जगमोहन ने बताया कि भगत सिंह ने मात्र 23 साल की उम्र में 350 किताबों का अध्ययन किया था और उनका मानना था कि युवाओं को गहन अध्ययन करना चाहिए ताकि वे हर सवाल का जवाब दे सकें।

प्रो. जगमोहन सिंह ने भगत सिंह की सोच के पांच मुख्य स्तंभों पर प्रकाश डाला: धर्म के जुनून से मुक्ति, जाति से मुक्ति, महिलाओं की आजादी, समाज में गैरबराबरी का अंत और पूंजीवाद का खात्मा। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में कुछ शक्तियां गांधी और नेहरू को कमतर करके खुद को ऊंचा दिखाना चाहती हैं, जबकि भगत सिंह समाज को एक सूत्र में जोड़ने का प्रयास कर रहे थे। प्रो. जगमोहन ने आजमगढ़ की अपनी यात्रा को तीर्थ यात्रा नहीं, बल्कि एक क्रांति यात्रा बताया।

भाकपा राज्य सचिव अरविंद राज स्वरूप ने कहा कि भगत सिंह 1917 की रूसी क्रांति से बहुत प्रभावित थे। उन्होंने कहा कि यदि भगत सिंह को फांसी नहीं दी गई होती, तो वे निश्चित रूप से कम्युनिस्ट पार्टी में होते। उनका प्रिय नारा “इंकलाब जिंदाबाद” सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक था। उन्होंने कार्ल मार्क्स के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि आज जो है, वह कल नहीं रहेगा।

जौनपुर से आए अधिवक्ता जयप्रकाश सिंह ने समाज में बदलाव के लिए भगत सिंह की तरह अध्ययन करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने भगत सिंह की जेल डायरी “मैं नास्तिक क्यों हूं” का उल्लेख किया, जिसे उन्होंने समग्र दर्शन का स्रोत बताया।

समाजवादी पार्टी से आजमगढ़ के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि आजमगढ़ हमेशा से समाजवादियों की धरती रही है और यहां के लोग फासीवादी ताकतों का विरोध करते रहे हैं। उन्होंने बीजेपी को किसान-मजदूर विरोधी और कॉर्पोरेट परस्त बताते हुए कहा कि सभी मिलकर उन्हें उत्तर प्रदेश की सत्ता से हटाएंगे।

इस कार्यक्रम में भाकपा से जुड़े स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों और वरिष्ठ नेताओं को स्मृति चिन्ह और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर इम्तेयाज बेग, रामाज्ञा यादव, गंगादीन, दयाशंकर राय, गुलाब मौर्य, बालेदीन यादव, राम अवध यादव, हरिगेन, गोपाल, रामावतार सिंह, प्रकाश सेठ, सुनील कुमार यादव, राम टहल, संजय कुमार, राजनाथ राज, अशोक कुमार यादव, रमेश कुमार सहित कई अन्य लोगों को सम्मानित किया गया।

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