भारत का परमाणु क्षेत्र निजी कंपनियों के लिए खुलेगा, 2047 तक 100 GW का लक्ष्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़े परिवर्तन का संकेत दिया है। उन्होंने घोषणा की है कि अब तक कड़ाई से नियंत्रित यह क्षेत्र जल्द ही निजी कंपनियों के लिए खोल दिया जाएगा। हैदराबाद में स्कायरूट एयरोस्पेस के ‘इन्फिनिटी कैंपस’ के उद्घाटन कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बोलते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कदम देश की ऊर्जा सुरक्षा को अभूतपूर्व रूप से मजबूत करेगा और भारत को तकनीकी नेतृत्व में नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
सरकार ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु बिजली उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्तमान में, देश की परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता केवल 8.8 गीगावॉट है, जिसका अर्थ है कि लक्ष्य मौजूदा क्षमता से दस गुना से भी अधिक है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, निजी क्षेत्र की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इस बदलाव से छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs), एडवांस्ड रिएक्टर डिजाइन और न्यूक्लियर इनोवेशन जैसे उभरते हुए क्षेत्रों में नए अवसर पैदा होंगे, जो भारत की आत्मनिर्भरता और तकनीकी प्रगति को गति देंगे।
इस ऐतिहासिक पहल को कानूनी जामा पहनाने के लिए, सरकार 1 दिसंबर से शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में एटॉमिक एनर्जी बिल 2025 पेश करने की योजना बना रही है। यह विधेयक निजी कंपनियों को परमाणु ऊर्जा उत्पादन में प्रवेश करने के लिए आवश्यक कानूनी आधार प्रदान करेगा। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में, एटॉमिक एनर्जी एक्ट, 1962 के प्रावधानों के तहत, परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के संचालन का अधिकार केवल केंद्र सरकार और उसकी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों तक सीमित है। निजी कंपनियों या राज्य सरकारों को इस क्षेत्र में काम करने की अनुमति नहीं है।
फरवरी में पेश किए गए बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी न्यूक्लियर लाइबिलिटी कानून में बदलाव की घोषणा की थी, जो इस क्षेत्र में निवेश को और प्रोत्साहित करेगा। इस नीतिगत बदलाव से न केवल ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि की उम्मीद है, बल्कि यह भारत को वैश्विक परमाणु ऊर्जा बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में भी सहायक सिद्ध हो सकता है। यह कदम भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता को मजबूत करने और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ने की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
