भाकपा माले ने लेबर कोड का किया कड़ा विरोध, प्रतिवाद सप्ताह की घोषणा
कतरास में भाकपा माले कार्यालय में शनिवार को आयोजित एक बैठक में केंद्र सरकार के नए लेबर कोड के खिलाफ तीखे तेवर अपनाए गए। पार्टी ने इन श्रम संहिताओं को तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए 22 से 28 नवंबर तक पूरे प्रदेश में प्रतिवाद सप्ताह चलाने का निर्णय लिया है।
भाकपा माले पोलित ब्यूरो सदस्य हलधर महतो ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी सरकार द्वारा लाए गए चारों लेबर कोड वास्तव में श्रमिकों को गुलाम बनाने और उनके ऐतिहासिक अधिकारों को छीनने की एक सोची-समझी साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून मजदूर वर्ग पर कॉर्पोरेट मालिकों की मनमानी थोपने का प्रयास है, जिससे सामाजिक सुरक्षा और कार्य सुरक्षा के संदर्भ में मजदूरों को समझौता करने के लिए विवश किया जाएगा।
पार्टी का मानना है कि इन लेबर कोड्स के माध्यम से मजदूरों के अधिकारों को कमजोर किया जाएगा, जबकि कॉर्पोरेट घरानों, पूंजीपतियों और नौकरशाही को असीमित अधिकार सौंपे जाएंगे। विशेष रूप से, महिला और अन्य असुरक्षित श्रमिकों के श्रम के खुले शोषण का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। इसके अतिरिक्त, यह कानून मजदूरों के संगठित होने और शोषण व दमन के खिलाफ आवाज उठाने, विशेषकर हड़ताल के अधिकार पर सीधा हमला है।
भाकपा माले ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह तत्काल इन जन विरोधी श्रम संहिताओं को वापस ले। पार्टी ने झारखंड राज्य की सभी श्रमिक संगठनों, प्रगतिशील ताकतों, जनसंगठनों और समाज के सभी न्यायप्रिय नागरिकों से अपील की है कि वे इस प्रतिवाद सप्ताह में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और अपनी एकता का परिचय दें। बैठक में पार्टी के कई स्थानीय नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिन्होंने इस आंदोलन को सफल बनाने का संकल्प लिया।
