भागलपुर-बांका में 106 उम्मीदवार नोटा से पीछे, जनता ने जताई गहरी नाराजगी
भागलपुर और बांका प्रमंडल की 12 विधानसभा सीटों पर हुए हालिया चुनावों में एक चौंकाने वाला रुझान सामने आया है, जिसने राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के बीच चिंता की लहर दौड़ा दी है। कुल 140 प्रत्याशियों में से 106 ऐसे रहे जिन्हें मतदाताओं ने ‘नोटा’ (उपरोक्त में से कोई नहीं) विकल्प से भी कम मत दिए। यह आंकड़ा केवल निराशाजनक ही नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया में जनता की बढ़ती असंतुष्टि को भी दर्शाता है।nnआंकड़ों के अनुसार, भागलपुर जिले की सात विधानसभा सीटों पर 82 प्रत्याशी मैदान में थे, जिनमें से 56 को नोटा से कम वोट मिले। वहीं, बांका जिले की पांच विधानसभा सीटों पर उतरे 58 प्रत्याशियों में से 40 ऐसे रहे जिन्हें जनता ने नोटा के मुकाबले भी कम समर्थन दिया। विशेष रूप से बेलहर और नाथनगर विधानसभा सीटें ऐसी रहीं जहाँ सर्वाधिक 11-11 प्रत्याशी नोटा से पीछे रहे, जो स्थानीय राजनीति में एक गंभीर खालीपन और उम्मीदवार चयन की कमजोर प्रक्रिया को उजागर करता है।nnयह स्थिति केवल उन प्रत्याशियों के लिए ही शर्मनाक नहीं है जिन्होंने बहुत कम वोट हासिल किए, बल्कि इसने चुनावी तंत्र के सामने भी एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। दोनों जिलों की 12 विधानसभा सीटों पर कुल मिलाकर 46,564 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना। इनमें भागलपुर जिले की सात सीटों पर 25,321 और बांका जिले की पांच सीटों पर 21,243 नोटा वोट पड़े। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि बड़ी संख्या में मतदाताओं को उपलब्ध उम्मीदवारों में से कोई भी योग्य या स्वीकार्य नहीं लगा।nnइस चुनाव परिणाम ने कई दिग्गजों की साख पर भी बट्टा लगाया है। सुल्तानगंज विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी ललन कुमार को करारी हार का सामना करना पड़ा, जहां 4108 नोटा वोटों की तुलना में उन्हें केवल 2754 वोट मिले। यह पारंपरिक वोट-बैंक के भी नेतृत्व पर भरोसा न कर पाने का संकेत है। इसी प्रकार, गोपालपुर विधानसभा में जन सुराज के उम्मीदवार मनकेश्वर सिंह को 4782 नोटा वोटों के मुकाबले 4701 वोट ही प्राप्त हुए। अमरपुर में सुजाता वैध को 6017 नोटा वोटों के मुकाबले 4789 वोट मिले, जबकि कटोरिया में जन सुराज की प्रत्याशी सलोमी मुर्मू को 5187 नोटा वोटों की तुलना में मात्र 2443 वोट मिले। यह परिणाम स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि मतदाता अब किसी भी उम्मीदवार को बिना सोचे-समझे वोट देने के मूड में नहीं हैं और वे अपनी असहमति व्यक्त करने से भी नहीं हिचकिचा रहे हैं।”
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