बुंदेलखंड के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी, सोलर फेंसिंग पर 80% सब्सिडी का मौका
बुंदेलखंड क्षेत्र के किसानों के लिए एक अत्यंत लाभकारी योजना का लाभ उठाने का अवसर फिर से आ गया है। सरकार ने बेसहारा गोवंशियों से फसलों को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से शुरू की गई सोलर फेंसिंग योजना के लिए आवेदन की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 31 दिसंबर कर दिया है। पहले यह तिथि 15 मई और फिर 5 सितंबर निर्धारित की गई थी, लेकिन किसानों की भारी रुचि और योजना के महत्व को देखते हुए, इसे तीसरी बार विस्तारित किया गया है।
यह योजना विशेष रूप से बुंदेलखंड के उन किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है जो हर साल अन्ना प्रथा और बेसहारा पशुओं के कारण अपनी फसलों के नुकसान से परेशान रहते हैं। इन पशुओं के कारण किसान अक्सर एक फसली खेती करने को मजबूर होते हैं, जिससे उनकी आय सीमित हो जाती है। सोलर फेंसिंग से खेतों की घेराबंदी करने पर यह समस्या काफी हद तक हल हो जाती है, जिससे किसान बेहतर उपज प्राप्त कर सकते हैं और अपनी आय बढ़ा सकते हैं।
योजना के तहत, किसानों के क्लस्टर बनाए जाएंगे, जिनमें प्रत्येक क्लस्टर में न्यूनतम पांच किसान शामिल होंगे। एक क्लस्टर 70 से 140 बीघे भूमि को कवर करेगा। इस योजना में कुल 843 क्लस्टर बनाए जाने का लक्ष्य है, जिसमें बुंदेलखंड के सभी सात जिलों के 49 विकास खंड शामिल हैं। बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा, ललितपुर, जालौन और झांसी जिलों में क्लस्टर का निर्धारण किया जा चुका है।
योजना में शामिल होने के लिए, किसानों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन के बाद, सोलर फेंसिंग के लिए आवश्यक सामग्री जैसे तार, इंगल, सोलर पैनल, सायरन और गेट आदि की कुल लागत का केवल 20% किसानों को वहन करना होगा। शेष 80% राशि का अनुदान सरकार द्वारा दिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, अब तक लक्ष्य का 60 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है, जो किसानों की इस योजना के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया को दर्शाता है।
चित्रकूट धाम मंडल के संयुक्त कृषि निदेशक डॉ. एलबी यादव ने बताया कि यह किसानों के लिए अपनी फसलों को सुरक्षित करने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने का एक सुनहरा अवसर है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया है कि वे इस अंतिम तिथि का लाभ उठाएं और ऑनलाइन आवेदन कर योजना का लाभ प्राप्त करें। यह कदम बुंदेलखंड जैसे कृषि-प्रधान क्षेत्र में किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
