मौनी अमावस्या पर अलीगढ़ में स्नान, दान और तर्पण, पितरों को मिली शांति
माघ मास की अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर अलीगढ़ सहित पूरे देश में श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान और दान-पुण्य किया। धार्मिक ग्रंथों में इस दिन का विशेष महत्व बताया गया है, खासकर महाकुंभ और माघ मेले में संगम स्नान का। जो लोग संगम तक नहीं पहुंच पाए, उन्होंने घर पर ही नहाने के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया।
धार्मिक जानकारों के अनुसार, मौनी अमावस्या आत्मसंयम, इंद्रिय निग्रह और मन की शुद्धि का पर्व है। इस दिन मौन रहकर किया गया जप, दान और स्नान हजार गुना फल प्रदान करता है। यह तिथि पितरों की तृप्ति, कर्म शुद्धि और मोक्ष साधना के लिए अत्यंत श्रेष्ठ मानी गई है।
शनिवार की रात से शुरू हुई अमावस्या तिथि रविवार की रात तक रही। इस दौरान लोगों ने स्नान के बाद मौन धारण किया। मन में ॐ नमः शिवाय, ॐ नमो नारायणाय और गुरु मंत्र का जप किया गया। लोगों ने पितरों को प्रसन्न करने के लिए तर्पण किया और पितृ दोष का शमन किया। साथ ही अन्न, वस्त्र, तिल, कंबल, घी और गुड़ का दान भी किया गया।
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