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ब्रज संस्कृति भारतीय संस्कृति की नींव: स्वामी महेशानंद सरस्वती

By Nov 25, 2025

रमणरेती मार्ग स्थित वृंदावन शोध संस्थान में सोमवार को ब्रजोत्सव – 2025 के छठवें दिन का शुभारंभ गोपाल सहस्त्रनाम पाठ, समाज गायन और डॉ. रामदास गुप्त स्मृति व्याख्यान के साथ हुआ। इस अवसर पर ‘ब्रज बानी कहै ब्रजराज कहानी’ शीर्षक से एक महत्वपूर्ण व्याख्यान का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यवक्ता प्रो. विद्योत्तमा मिश्रा ने कहा कि ब्रज केवल एक क्षेत्र नहीं, बल्कि भारत का हृदय है। उन्होंने ब्रज को प्रेम, भाव, लीला, कर्म, योग, शौर्य एवं शक्ति की पावन भूमि बताया। प्रो. मिश्रा ने यह भी उल्लेख किया कि शुक्लयजुर्वेद, पद्म पुराण, वराह पुराण एवं विभिन्न संहिताओं में ब्रज का गौरवपूर्ण उल्लेख मिलता है, जो इसके प्राचीन महत्व को दर्शाता है।nnकार्यक्रम के अध्यक्ष स्वामी महेशानंद सरस्वती ने अपने संबोधन में ब्रज संस्कृति के भारतीय संस्कृति में मौलिक योगदान पर जोर देते हुए कहा कि यह हमारी समग्र संस्कृति का मूलाधार है। उन्होंने ब्रजभाषा की साहित्यिक समृद्धि को रेखांकित किया, जिसमें आत्मकथा, काव्यशास्त्र, वीर काव्य, एवं भक्ति काव्य जैसी महत्वपूर्ण रचनाएं हुई हैं।nnवृंदावन शोध संस्थान के अध्यक्ष आर.डी. पालीवाल ने संस्थान के पिछले 58 वर्षों के अथक प्रयासों की सराहना करते हुए बताया कि संस्थान ने ब्रज संस्कृति और ब्रजभाषा के संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए उल्लेखनीय कार्य किए हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।nnइसी क्रम में, रासलीला के अनुकरण में प्रयुक्त होने वाले वस्त्र अलंकरणों पर आधारित एक विशेष प्रदर्शनी का लोकार्पण भी किया गया, जो ब्रज की कलात्मक विरासत की एक झलक प्रस्तुत करती है। कार्यक्रम का आरंभ रंगनाथ पादुका वैदिक गुरुकुल के छात्रों द्वारा स्वस्तिवाचन और मंगलाचरण से हुआ। भूमिका उपाध्याय और प्रभुदास बाबा ने अपनी काव्य प्रस्तुतियां दीं। विनोद झा ने गोपाल सहस्त्रनाम का पाठ किया, जबकि पुलकित खण्डेलवाल, हित शरण दास, राधावल्लभ दास, व्यासनंदन, माधुरी शरण, प्रेम बिहारिन दास, एवं गंगा प्रिया ने सामूहिक समाज गायन प्रस्तुत कर समां बांधा।nnब्रजभाषा कवि सम्मेलन में मोहनलाल मोही, डॉ. नीतू गोस्वामी, डॉ. ब्रजभूषण चतुर्वेदी, अशोक अज्ञ, शिवांगी प्रेरणा, अटलराम चतुर्वेदी, रेनू उपाध्याय एवं राम गोपाल ग्वाल जैसे कवियों ने अपनी मनोरम काव्य रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। संस्थान द्वारा इस वर्ष का ‘पार्थ सारथी मिश्र तन्मय साधक सम्मान’ ध्रुपद गायिका सुश्री भव्या सारस्वत को प्रदान किया गया, जो उनके उत्कृष्ट संगीत योगदान का प्रतीक है।nnइस गरिमामय अवसर पर संस्थान निदेशक डॉ. राजीव द्विवेदी, महेश खण्डेलवाल, बलराम बाबा, स्वामी गोविंदानंद तीर्थ, पद्मश्री कृष्ण कन्हाई, उदयन शर्मा, सुशीला गुप्ता, सचिव प्रवीण गुप्ता, विभुकृष्ण भट्ट, जनार्दन भट्ट सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. राजेश शर्मा एवं ममता कुमारी ने किया।”
कुमारी ने किया।

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