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बरेली के नाथ कॉरिडोर का निर्माण तेज: फरवरी 2026 तक पूरा होने की उम्मीद

By Nov 23, 2025

बरेली में आस्था और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विकसित किए जा रहे नाथ कॉरिडोर का निर्माण कार्य अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। लगभग 50 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत शहर के सात प्रमुख नाथ मंदिरों को आपस में जोड़कर उन्हें एक भव्य महादेव धार्मिक सर्किट के रूप में विकसित किया जाना है। इस परियोजना के फरवरी 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है, जिससे बरेली को एक प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में पहचान मिलेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

सूत्रों के अनुसार, निर्माण कार्यों में आ रही कुछ बाधाओं, विशेषकर वनखंडीनाथ और अलखनाथ मंदिरों के आसपास के अवरोधों को मंडलायुक्त के हस्तक्षेप के बाद दूर कर लिया गया है। उप निदेशक पर्यटन रवींद्र कुमार ने इन समस्याओं के त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए थे, जिससे परियोजना को निर्धारित समय-सीमा में पूरा किया जा सके। योगी सरकार का यह प्रयास केवल मंदिरों का सौंदर्यीकरण ही नहीं, बल्कि प्रदेश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को युवाओं से जोड़ना तथा बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करना भी है। बरेली की सदियों पुरानी नाथ तीर्थ के रूप में पहचान को आधुनिक और विश्वस्तरीय स्वरूप प्रदान करने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण है।

इस परियोजना के तहत अलखनाथ, तपेश्वर नाथ, पशुपतिनाथ, धोपेश्वर नाथ, वनखंडी नाथ, त्रिवटीनाथ, तुलसी मठ और कांवड़ स्थल को एक ही सर्किट में शामिल किया जा रहा है। प्रत्येक स्थल पर आधुनिक विकासपरक सुविधाएं, सौंदर्यीकरण और यात्री सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। बदायूं रोड पर चार करोड़ की लागत से एक विशाल कांवड़ स्थल भी तैयार किया जा रहा है, जिसमें सावन माह के दौरान लाखों शिवभक्तों की सुविधा के लिए विशाल हॉल, पुरुष-महिला परिसर, विश्राम स्थल और अन्य आवश्यक सुविधाएं शामिल होंगी।

प्रशासन का दावा है कि नाथ कॉरिडोर के पूरा होने के बाद धार्मिक पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे होटल, परिवहन, भोजनालय, फूल, प्रसाद विक्रेताओं और अन्य स्थानीय व्यवसायों में बड़ी उछाल आने की संभावना है। हजारों युवाओं के लिए नई रोजगार की संभावनाएं खुलेंगी और बरेली की पहचान एक विकसित नाथ तीर्थ और आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि नाथ परंपरा उत्तर भारत की सांस्कृतिक रीढ़ है और नाथनगरी को उसी गरिमा के अनुरूप विकसित किया जाना चाहिए।

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