बांग्लादेश चुनाव: निष्पक्षता पर सवाल, भारत ने भी की ‘free and fair’ चुनाव की मांग
बांग्लादेश में होने वाले आम चुनाव से ठीक दो महीने पहले, भारत ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत बांग्लादेश में स्वतंत्र, निष्पक्ष, समावेशी और शांतिपूर्ण माहौल में चुनाव का समर्थन करता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश के राजनीतिक परिदृश्य में बड़े बदलाव हुए हैं और चुनाव की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बांग्लादेश में निष्पक्ष चुनाव कराना एक बड़ी चुनौती रही है। 2008 के बाद से देश में कोई भी चुनाव पूरी तरह से स्वतंत्र नहीं माना गया है। 2014 में, खालिदा ज़िया की पार्टी बीएनपी (BNP) ने शेख हसीना सरकार द्वारा तटस्थ कार्यवाहक सरकार के तहत चुनाव कराने से इनकार करने के विरोध में मतदान का बहिष्कार किया था। 2018 में, खालिदा ज़िया भ्रष्टाचार के मामलों में जेल में होने के कारण चुनाव नहीं लड़ पाई थीं।
वर्तमान में, स्थिति पूरी तरह से बदल गई है। पिछले साल जुलाई में हुए छात्र विद्रोह के बाद शेख हसीना को सत्ता से हटा दिया गया था। अब हसीना और उनका परिवार निर्वासन में है, और उन पर जुलाई के विद्रोह को दबाने के आरोप में मौत की सजा का खतरा मंडरा रहा है।
दूसरी ओर, खालिदा ज़िया के बेटे तारिक रहमान 17 साल बाद बांग्लादेश लौट आए हैं। शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद से खालिदा ज़िया और तारिक रहमान के खिलाफ कई मामले खत्म हो गए हैं। अंतरिम नेता मुहम्मद यूनुस ने अवामी लीग को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया है, जिससे बीएनपी को प्रमुख दावेदार के रूप में देखा जा रहा है।
तारिक रहमान ने एक साक्षात्कार में अवामी लीग के चुनाव से बाहर होने पर सवालों को टाल दिया और कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी ठहराए गए लोग चुनाव में भाग नहीं ले सकते। हालांकि, हसीना के शासन को उखाड़ उखाड़ फेंकने वाले छात्र-नेतृत्व वाले नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) ने भी चुनाव की निष्पक्षता पर चिंता व्यक्त की है।
