बलरामपुर में मध्यान्ह भोजन योजना में 11 करोड़ का गबन, डीसी समेत पांच गिरफ्तार
बलरामपुर पुलिस ने मध्यान्ह भोजन (एमडीएम) योजना में बड़े पैमाने पर हुए गबन का पर्दाफाश करते हुए एमडीएम सेल के जिला समन्वयक सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में 44 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि अन्य अज्ञात सहयोगियों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने पर्याप्त सबूत जुटाने के बाद यह बड़ी कार्रवाई की है।
सूत्रों के अनुसार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने नगर कोतवाली में तहरीर देकर आरोप लगाया है कि मध्यान्ह भोजन योजना में साठगांठ कर कन्वर्जन कास्ट के अभिलेखों में कूटरचना की गई, जिसके परिणामस्वरूप 11 करोड़ रुपये से अधिक का गबन हुआ। इस तहरीर के आधार पर एमडीएम सेल के जिला समन्वयक फिरोज अहमद खान समेत 44 लोगों को नामजद करते हुए अन्य सहयोगियों पर मुकदमा दर्ज किया गया।
पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में एक टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जिला समन्वयक एमडीएम सेल फिरोज अहमद खान, प्रधानाध्यापक अशोक कुमार गुप्त, प्रधान नसीम अहमद, विद्यालय प्रबंध समिति अध्यक्ष मो. अहमदुल कादरी और सहायक अध्यापक मलिक मुनव्वर को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया जाएगा। पुलिस अन्य फरार आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही है।
आरोपियों ने पूछताछ में गबन के तरीके का खुलासा किया है। डीसी फिरोज अहमद खान ने बताया कि बेसिक शिक्षा विभाग के आईवीआरएस पोर्टल से जिले के 2200 विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या का पता लगाया जाता था। इसके बाद, छात्रों की संख्या के सापेक्ष शासन द्वारा निर्धारित कन्वर्जन कास्ट के आधार पर धनराशि की गणना कर एक एक्सेल शीट तैयार की जाती थी। इस शीट को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से अग्रसारित करवाकर और वित्त लेखाधिकारी से परीक्षित कराकर स्वीकृति के लिए जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाता था।
जिलाधिकारी के अनुमोदन के बाद, इस एक्सेल शीट को पीएफएमएस पोर्टल पर अपलोड किया जाना था, ताकि निर्धारित धनराशि सीधे विद्यालयों के खातों में पहुंच सके। हालांकि, गिरफ्तार डीसी ने मूल एक्सेल शीट को अपलोड करने के बजाय, अपने सहयोगियों के खातों में भेजी जाने वाली धनराशि को बढ़ा दिया। इसके बाद, उसी बढ़ी हुई धनराशि के सापेक्ष अन्य विद्यालयों के खातों से राशि कम कर दी जाती थी। इस प्रक्रिया से जिलाधिकारी द्वारा अनुमोदित कुल धनराशि में कोई अंतर नहीं दिखता था, जिससे गबन का पता लगाना मुश्किल हो जाता था।
इस कूटरचना के परिणामस्वरूप, जिन विद्यालयों में धनराशि बढ़ाई गई थी, वहां के प्रधानाध्यापक, ग्राम प्रधान और अभिभावक समिति के अध्यक्ष धनराशि निकालकर आपस में बांट लेते थे। पुलिस इस पूरे गिरोह का पर्दाफाश करने और गबन की गई पूरी राशि की वसूली के लिए आगे की जांच कर रही है।
