बीआरए बिहार विश्वविद्यालय: जनवरी में परीक्षा, कक्षाएं अब तक शुरू नहीं, छात्र परेशान
बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र एक बार फिर अव्यवस्था की भेंट चढ़ता दिख रहा है। स्नातक थर्ड सेमेस्टर की परीक्षाएं अगले वर्ष जनवरी में होनी हैं, लेकिन कॉलेजों में अभी तक कक्षाएं शुरू नहीं हो सकी हैं। इस स्थिति से विश्वविद्यालय से जुड़े करीब 1.20 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं हताश और चिंतित हैं। उन्हें डर है कि समय पर पाठ्यक्रम पूरा नहीं होने के कारण वे परीक्षा की तैयारी ठीक से नहीं कर पाएंगे।
विश्वविद्यालय के कैलेंडर के अनुसार, सेकंड सेमेस्टर की परीक्षा समाप्त हो चुकी है और इसका परिणाम 15 दिसंबर तक जारी होने की उम्मीद है। इसके ठीक बाद, 16 जनवरी से थर्ड सेमेस्टर की परीक्षाएं शुरू होनी हैं। इस प्रकार, छात्रों के पास परीक्षा की तैयारी के लिए दो महीने से भी कम का समय बचा है। ऐसे में, बिना पढ़ाई के ही परीक्षा में बैठने की नौबत आ सकती है, जो छात्रों के भविष्य के लिए चिंता का विषय है।
मंगलवार को स्नातक सत्र 2024-28 के कई छात्र-छात्राएं विश्वविद्यालय पहुंचे और उन्होंने महाविद्यालयों में थर्ड सेमेस्टर की कक्षाएं शुरू न होने की शिकायत की। एलएस कॉलेज सहित अन्य कॉलेजों से आए छात्रों ने जल्द से जल्द कक्षाएं संचालित कराने की गुहार लगाई। उनका कहना है कि शिक्षकों से पूछने पर वे विश्वविद्यालय से अधिसूचना जारी होने का इंतजार करने की बात कह रहे हैं। शिक्षकों का तर्क है कि विश्वविद्यालय द्वारा आधिकारिक सूचना जारी होने के बाद ही कक्षाएं शुरू की जा सकती हैं।
वहीं, स्नातक सत्र 2023-27 के फोर्थ सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने भी विश्वविद्यालय पहुंचकर अपनी समस्या बताई। अर्थशास्त्र, जूलाजी, गणित, अंग्रेजी जैसे विषयों के छात्रों ने कहा कि कॉलेजों में केवल एमजेसी कोर्स की कक्षाएं चल रही हैं, जबकि माइनर कोर्स की पढ़ाई बिल्कुल नहीं हो रही है। इससे एबिलिटी एन्हांसमेंट कोर्स (AEC) की कक्षाएं होना असंभव लग रहा है। छात्रों ने यह भी बताया कि पिछले सेमेस्टर में परीक्षा से कुछ दिन पहले ही उन्हें पाठ्यक्रम की जानकारी दी गई थी, और फोर्थ सेमेस्टर के लिए अब तक एईसी का सिलेबस भी नहीं मिला है। अगले महीने से उनकी परीक्षाएं शुरू होनी हैं, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई है।
इस बीच, कई छात्रों ने चार वर्षीय स्नातक कोर्स के तहत एग्जिट पॉलिसी के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने विश्वविद्यालय के डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर (DSW) से अनुरोध किया है कि उन्हें तीन साल में ही स्नातक की डिग्री लेने की अनुमति दी जाए, भले ही उसमें रिसर्च का हिस्सा शामिल न हो। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे वे बिना रिसर्च के भी तीन साल में डिग्री प्राप्त कर सकें।
डीएसडब्ल्यू डॉ. आलोक प्रताप सिंह ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही कक्षाओं की शुरुआत संबंधी अधिसूचना जारी की जाएगी। उन्होंने कहा कि कॉलेजों में कक्षाओं की शुरुआत अविलंब होनी चाहिए। हालांकि, छात्रों को उम्मीद है कि यह आश्वासन जल्द ही हकीकत में बदलेगा और उनकी शैक्षणिक प्रक्रिया पटरी पर लौटेगी।
