बीपीएल सूची से बाहर हुए हजारों परिवार, गरीबों की बढ़ी आजीविका की चिंता
सोनीपत जिले में पिछले दो महीनों में गरीबी रेखा (बीपीएल) सूची से 25,474 परिवारों को हटा दिया गया है, जिसके बाद अब जिले में केवल 2,13,347 परिवार ही इस सूची में शामिल हैं। बीपीएल कार्डों में हो रही इस लगातार कटौती ने गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
अब बीपीएल सूची से हटाए जाने का मुख्य कारण बिजली बिल का एक निश्चित सीमा से अधिक होना बताया जा रहा है। नए नियमों के अनुसार, यदि किसी परिवार का बिजली बिल 24,000 रुपये या उससे अधिक पाया जाता है, तो उसका बीपीएल कार्ड स्वतः ही काट दिया जाएगा। इस नियम के चलते कई ऐसे परिवार जो आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं, वे भी सूची से बाहर हो रहे हैं।
कई उपभोक्ताओं ने इस संबंध में चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि बढ़ती महंगाई और आवश्यक बिजली उपकरणों के उपयोग के कारण बिजली बिल का बढ़ना स्वाभाविक है। उनका आरोप है कि बिना पूरी जांच-पड़ताल के ही उनके कार्ड काट दिए जा रहे हैं। ऐसे में, उनकी मांग है कि बीपीएल कार्ड काटने से पहले उचित जांच की जानी चाहिए ताकि केवल वही परिवार सूची से बाहर हों जो वास्तव में आर्थिक रूप से सक्षम हो चुके हैं।
इसके अतिरिक्त, यदि कोई परिवार लगातार छह महीने तक राशन डिपो से अपना निर्धारित अनाज नहीं लेता है, तो उसे भी बीपीएल सूची से निष्क्रिय माना जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि नियमित सत्यापन और उपयोग की निगरानी इसलिए अनिवार्य की गई है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि लाभ केवल उन्हीं परिवारों को मिले जो वास्तव में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। कई ऐसे कार्ड भी पाए गए हैं जो ऐसे परिवारों के पास थे जो अब बीपीएल श्रेणी में नहीं आते।
बीपीएल कार्ड कटने से प्रभावित परिवारों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं में तत्काल रोक लग जाती है। इन सुविधाओं में राशन डिपो से रियायती दरों पर अनाज, आटा, चावल, दाल, तेल और चीनी का वितरण शामिल है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में भी बीपीएल कार्ड धारकों को प्राथमिकता दी जाती है।
कार्ड कटने के बाद इन परिवारों को न केवल इन लाभों से वंचित होना पड़ता है, बल्कि उन्हें दोबारा बीपीएल सूची में शामिल कराने के लिए एक लंबी और जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इस कारण, कई परिवार सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, जिससे उनकी आर्थिक और मानसिक परेशानी और बढ़ जाती है। ऐसे में, यह आवश्यक है कि बीपीएल सूची को अधिक पारदर्शी और सुलभ बनाया जाए ताकि लाभ केवल वास्तविक जरूरतमंदों तक ही पहुंचे।
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