बिजली दरों में 8% राहत की मांग, उपभोक्ताओं का कंपनियों पर 33,122 करोड़ बकाया
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने उपभोक्ताओं को बिजली बिलों में होने वाली वृद्धि से राहत देने की पुरजोर मांग की है। परिषद का कहना है कि प्रदेश की बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का 33,122 करोड़ रुपये का सरप्लस बकाया है, ऐसे में बिजली की दरों में बढ़ोतरी का कोई औचित्य नहीं बनता। परिषद के अध्यक्ष और राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने रविवार को कहा कि इस वर्ष भी कंपनियों पर चार हजार करोड़ रुपये से अधिक का सरप्लस अपेक्षित है।
अवधेश कुमार वर्मा ने सुझाव दिया कि उपभोक्ताओं के इस सरप्लस के आधार पर अगले पांच वर्षों तक बिजली दरों में कम से कम आठ प्रतिशत की कटौती की जानी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि एक साथ 40 प्रतिशत की कमी करना पावर कारपोरेशन के लिए वहन करना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने सरकार का ध्यान बिहार की ओर आकर्षित करते हुए कहा कि वहां एक अगस्त 2025 से 1.67 करोड़ घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट बिजली मुफ्त दी जा रही है।
परिषद ने विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 108 के तहत सरकार से हस्तक्षेप करने और आयोग को निर्देश जारी करने की अपील की है, ताकि 3.61 करोड़ उपभोक्ताओं की बिजली दरों में कमी करके उन्हें उनका हक दिया जा सके। वर्मा ने कहा कि जनता पर अतिरिक्त बोझ डालने की बजाय, इस सरप्लस राशि का उपयोग करके उन्हें राहत देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने पहले ही छोटे घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को मूलधन में 25 प्रतिशत तक की छूट दी है, और अब नियमित रूप से बिल जमा करने वालों को भी दरों में कमी करके राहत देने की जरूरत है।
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