बिहार में जमीन की सरकारी दरें होंगी बाजार भाव के अनुसार, प्रक्रिया शुरू
बिहार में जमीन की सरकारी दरों में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सरकार ने जमीन की सरकारी दर को पूरी तरह से बाजार मूल्य के अनुसार तय करने का निर्णय लिया है और इस दिशा में प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। सूत्रों के अनुसार, मुख्य सचिव के निर्देश के बाद तिरहुत प्रमंडल के सहायक निबंधन महानिरीक्षक (एआइजी) राकेश कुमार ने प्रमंडल के सभी जिला अवर निबंधक और अवर निबंधकों को वर्तमान बाजार दर के अनुसार वास्तविक न्यूनतम मूल्य रजिस्टर (एमवीआर) बनाने के लिए कहा है।
शुक्रवार को जारी एक पत्र में एआइजी ने स्पष्ट किया है कि शहरी, पेरिफेरल (शहरी सीमा से सटे) और ग्रामीण क्षेत्रों में वर्तमान में प्रभावी एमवीआर का पुनरीक्षण किया जाना है। यह कदम चार नवंबर को हुई विभागीय समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव द्वारा दिए गए निर्देशों के आलोक में उठाया गया है। इस पुनरीक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एमवीआर वर्तमान में प्रचलित बाजार दर को प्रतिबिंबित करे। विशेष रूप से, उन मौजों (गांवों) का विवरण उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है जिनके वर्तमान एमवीआर और प्रचलित बाजार दर में काफी अंतर है।
यह भी बताया गया है कि औद्योगिक क्षेत्रों के लिए एमवीआर अलग से तैयार किया जाएगा। एआइजी ने एमवीआर पुनरीक्षण का कार्य यथाशीघ्र शुरू करने का निर्देश दिया है। इस कदम से यह उम्मीद की जा रही है कि राज्य में जमीन की सरकारी दरें बढ़ेंगी, जिससे जमीन की रजिस्ट्री भी महंगी हो जाएगी।
वर्तमान में, बिहार में ग्रामीण क्षेत्रों की जमीन का एमवीआर वर्ष 2014 से और शहरी क्षेत्रों का 2016 से नहीं बढ़ाया गया है। इस अवधि में जमीन की बाजार दरें कई गुना बढ़ चुकी हैं। पुरानी दरों के आधार पर जमीन की खरीद-बिक्री से सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है, जबकि हर साल राजस्व लक्ष्य बढ़ रहा है। दरें नहीं बढ़ने से लक्ष्य की प्राप्ति कठिन हो रही थी।
इस बदलाव के साथ ही, राज्य में जमीन के वर्गीकरण की प्रक्रिया में भी सुधार किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों की जमीन का वर्गीकरण सात तरह से होगा, जबकि शहरी क्षेत्रों में छह तरह से वर्गीकरण किया जाएगा, जिसमें औद्योगिक क्षेत्र भी शामिल होगा।
