बहरीन को भाया अलीगढ़ का आलू, 29 टन Aligarh Potato Export रवाना
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ का आलू अब न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी अपनी विशेष पहचान बना चुका है। अपनी अनूठी गुणवत्ता और स्वाद के कारण यहां का आलू खाड़ी देशों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। हाल ही में, एग्री साइन एफपीओ ने एक कंटेनर में 29 टन आलू बहरीन भेजा है, जो समुद्री मार्ग से वहां पहुंचेगा। यह निर्यात अलीगढ़ के किसानों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि इससे उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती मांग
एग्री साइन एफपीओ के निदेशक जितेंद्र अवस्थी ने बताया कि अलीगढ़ के आलू की गुणवत्ता को विदेशियों ने खूब सराहा है, जिसके चलते उन्हें दोबारा ऑर्डर मिले हैं। इस बार फ्राई सोना, फ्राई ओम, सूर्या, सुपर 6 और मलवरी ब्यूटी जैसी प्रजातियों के आलू बहरीन भेजे गए हैं। इससे पहले भी फ्राई सोना, चिपसोना, एलआर और संथाना आलू दुबई, तेहरान और बहरीन भेजे जा चुके हैं। गल्फ देश दोहा में भी आलू के सैंपल भेजे गए हैं, जो भविष्य में निर्यात के नए रास्ते खोल सकते हैं। विदेशों में आलू का भाव 88 रुपये प्रति किलो तक मिल रहा है, जो भारतीय किसानों के लिए काफी फायदेमंद है।
किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
उप निदेशक उद्यान बलजीत सिंह ने बताया कि आलू के इस अंतरराष्ट्रीय निर्यात से स्थानीय किसानों को बहुत लाभ होगा। अक्सर छोटे या बड़े आकार के आलू को घरेलू बाजार में कम कीमत मिलती है या उन्हें खराब मानकर नहीं खरीदा जाता। लेकिन विदेशी बाजारों में हर तरह के आलू को पसंद किया जाता है, जिससे किसानों को अपनी पूरी उपज की अच्छी कीमत मिल पाती है। यह पहल किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
बाजार पर दबाव होगा कम
आलू के विदेशों में निर्यात से घरेलू बाजार पर दबाव कम होगा। जब आलू की पैदावार अधिक होती है, तो कीमतें गिर जाती हैं, और कम पैदावार होने पर कीमतें बढ़ जाती हैं। निर्यात से बाजार में संतुलन बना रहेगा, जिससे कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव नहीं आएगा। विदेशों में सूखे तत्व की अधिक मात्रा वाले आलू को प्राथमिकता दी जाती है, और निर्यात बढ़ने पर किसान उसी हिसाब से विभिन्न किस्मों के आलू की पैदावार कर सकेंगे। उद्यान विभाग के अनुसार, आने वाले समय में और अधिक आलू का निर्यात करवाया जाएगा, जिससे किसानों को उनकी मेहनत का पूरा फल मिल सके।
