बेगूसराय पशु अस्पताल में कर्मियों और दवाओं की भारी कमी, सुविधाओं का अभाव
साहेबपुर कमाल प्रखंड में स्थित प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय अव्यवस्था का पर्याय बन गया है। दैनिक जागरण के प्रतिनिधि द्वारा किए गए निरीक्षण में अस्पताल की बदहाली स्पष्ट रूप से सामने आई। अस्पताल के मुख्य द्वार के पास ही घनी झाड़ियों का साम्राज्य फैला हुआ है, जिसमें कबाड़नुमा टूटा-फूटा ट्रैक्टर का हिस्सा आधा दबा पड़ा है। झाड़ियों की ऊंचाई इतनी अधिक है कि अस्पताल का सूचना बोर्ड भी आंशिक रूप से ढक गया है।
अस्पताल के ओपीडी कक्ष में भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी डा. राजेंद्र कुमार साह पशुपालकों की समस्याएं सुनते हुए मिले। दो मंजिला भवन में निचले तल पर तीन कमरों में अस्पताल संचालित होता है, जबकि ऊपरी मंजिल पर आवासीय परिसर है। समस्तीपुर ग्राम निवासी श्यामलाल कुमार अपनी गाय की आंख की चोट का इलाज कराने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि अस्पताल में आई ड्रॉप जैसी कई आवश्यक दवाएं उपलब्ध नहीं हैं और उन्हें बाहर से खरीदने के लिए कहा गया। पेट खराब होने पर कभी-कभी डायरोक पाउडर मिल जाता है, लेकिन अन्य महत्वपूर्ण दवाएं अनुपलब्ध हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इलाज के अभाव में कई पशुपालक मुंगेर के पशु चिकित्सालय पर निर्भर रहने को मजबूर हैं।
कर्मियों की कमी इस अस्पताल के लिए एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। डॉ. राजेंद्र कुमार साह के अलावा, केवल दो परिचारी, छोटू कुमार और विकास कुमार, कार्यरत हैं जो पशुधन पर्यवेक्षक का काम भी करते हैं। दवा स्टोर में स्टोर कीपर का पद रिक्त है, और केवल एक कंप्यूटर ऑपरेटर ही तैनात है।
हालांकि, इन गंभीर कमियों के बावजूद, अस्पताल में ब्रूसेलोसिस (बीक्यू) और गलघोटू (एचएस) जैसी घातक बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। 16 नवंबर से शुरू हुए इस पखवाड़ा अभियान का लक्ष्य 17 पंचायतों के 32 हजार पशुओं का टीकाकरण करना है, जिसमें अब तक 18 हजार पशुओं का टीकाकरण हो चुका है। दवा स्टोर में 35 प्रकार की दवाएं पाई गईं और पशु एंबुलेंस भी कार्यरत मिली। नया टोला निवासी वीरेंद्र महतो अपने पशु के मुंहपका रोग की शिकायत लेकर पहुंचे थे, जिन्हें उचित उपचार और टीकाकरण की जानकारी दी गई। पशुपालक उपचार से संतुष्ट दिखे।
इस तरह, एक ओर जहां टीकाकरण जैसे महत्वपूर्ण अभियान जारी हैं, वहीं दूसरी ओर मूलभूत सुविधाओं, कर्मचारियों और आवश्यक दवाओं की कमी अस्पताल की कार्यप्रणाली को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है, जिससे पशुपालकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
