बच्चों में बढ़ रहा टाइप-2 डायबिटीज का खतरा: ऐसे 7 लक्षण दिखते ही तुरंत लें डॉक्टरी सलाह
डायबिटीज एक गंभीर और लाइलाज बीमारी है, जिसे सिर्फ सही दवाओं और जीवनशैली में बदलावों के जरिए ही नियंत्रित किया जा सकता है। दुनियाभर में, विशेषकर भारत में, इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। चिंता की बात यह है कि अब यह बीमारी सिर्फ बड़े-बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि बच्चे भी इसकी चपेट में आने लगे हैं। इस समस्या के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 14 नवंबर को विश्व मधुमेह दिवस मनाया जाता है।
मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग में बाल रोग विभाग के सीनियर डायरेक्टर और एचओडी डॉ. परविंदर सिंह नारंग बताते हैं कि बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज कम उम्र में तेजी से बढ़ रहा है। इसके प्रमुख जोखिम कारकों में बच्चों का बढ़ता वजन, शारीरिक गतिविधि की कमी और चीनी व प्रोसेस्ड फूड्स का अत्यधिक सेवन शामिल है। इसके अलावा, यदि परिवार में डायबिटीज का इतिहास रहा हो, तो मोटापे के साथ-साथ बच्चों में इस बीमारी की संभावना और बढ़ जाती है। डॉ. नारंग के अनुसार, गेस्टेशनल डायबिटीज से पीड़ित माताओं से जन्मे बच्चों में भी यह समस्या अधिक आम है, खासकर यदि वे बाद में मोटापे का शिकार हो जाते हैं।
डॉक्टर बताते हैं कि बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज अक्सर मेटाबॉलिक सिंड्रोम और पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम का एक हिस्सा होता है। मोटापा इंसुलिन रेजिस्टेंस का कारण बनता है, जिससे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हाई ट्राइग्लिसराइड्स और कमर का आकार बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। इसके साथ ही, गर्दन और बगल के आसपास त्वचा का काला पड़ना, जिसे एकेन्थोसिस निग्रिकन्स कहते हैं, भी इंसुलिन रेजिस्टेंस का एक महत्वपूर्ण संकेत है।
बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज के लक्षण धीरे-धीरे उभरते हैं, जिन्हें बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इनमें अत्यधिक प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना और लगातार थकान महसूस होना प्रमुख हैं। यदि इस बीमारी का समय रहते इलाज न किया जाए, तो बच्चों में कम उम्र में ही कई गंभीर जटिलताएं विकसित हो सकती हैं। इनमें हाई कोलेस्ट्रॉल, हृदय रोग, रक्त वाहिकाओं से संबंधित बीमारियां, तंत्रिका क्षति, स्ट्रोक, क्रोनिक किडनी रोग और आंखों से जुड़ी समस्याएं जैसे अंधापन भी शामिल हैं।
इसलिए यह बेहद जरूरी है कि माता-पिता बच्चों में इन लक्षणों के प्रति सतर्क रहें। यदि आपके बच्चे में ऐसे कोई भी संकेत दिखाई दें, तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लें। समय पर पहचान और उचित जीवनशैली में बदलावों के साथ-साथ डॉक्टरी मार्गदर्शन से इस गंभीर बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है और बच्चे को भविष्य की जटिलताओं से बचाया जा सकता है।
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