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बाराबंकी से छपरा तक तीसरी रेल लाइन: 425 किमी की परियोजना, 1117 करोड़ लागत

By Dec 1, 2025

पूर्वोत्तर रेलवे ने गोरखपुर के रास्ते बाराबंकी से छपरा तक एक महत्वपूर्ण तीसरी रेल लाइन बिछाने की योजना को आगे बढ़ाया है। यह 425 किलोमीटर लंबी परियोजना रेल नेटवर्क की क्षमता को बढ़ाने और यात्री एवं मालगाड़ियों के समयपालन में सुधार लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की अनुमानित लागत 1117 करोड़ रुपये बताई गई है।

इस परियोजना के तहत, घाघरा घाट और बुढ़वल के बीच तीसरी रेल लाइन का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। इस खंड में घाघरा नदी पर एक महत्वपूर्ण पुल का निर्माण भी शामिल है, जो परियोजना का एक अहम हिस्सा है। सूत्रों के अनुसार, 5 दिसंबर को रेल संरक्षा आयुक्त उत्तर पूर्व सर्किल इस नई तीसरी रेल लाइन का निरीक्षण करेंगे और स्पीड ट्रायल भी चलाएंगे। इसके सफल निरीक्षण के बाद इस खंड पर ट्रेनों का परिचालन शुरू हो जाएगा, जिससे रेल यातायात सुगम होगा।

पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी के अनुसार, रेलवे में मल्टीट्रैकिंग का कार्य तीव्र गति से चल रहा है। मल्टीट्रैकिंग से न केवल लाइन की क्षमता बढ़ती है, बल्कि ट्रेनों के समय पालन में भी उल्लेखनीय सुधार होता है। इसी क्रम में, छपरा ग्रामीण-बाराबंकी मुख्य रेल मार्ग पर तीसरी लाइन निर्माण का कार्य भी तेजी से चल रहा है। अब तक, छपरा ग्रामीण-छपरा और कुसम्ही-डोमिनगढ़ रेल खंडों पर तीसरी लाइन सफलतापूर्वक चालू की जा चुकी है। गोंडा-बुढ़वल (61.72 किमी) तीसरी लाइन निर्माण परियोजना के अंतर्गत, गोंडा कचहरी-घाघरा घाट (45.42 किमी) का काम पूरा हो चुका है।

इस नई लाइन की कमीशनिंग से रेल क्षमता में वृद्धि होगी, जिससे गाड़ियों के समयपालन में सुधार के साथ-साथ अधिक ट्रेनों का संचालन संभव हो सकेगा। यह कदम यात्रियों की बढ़ती मांगों को पूरा करने और रेल सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

परियोजना के तहत, घाघरा घाट-चौकाघाट स्टेशनों के मध्य घाघरा नदी (सरयू) पर एक तीसरा पुल भी महत्वपूर्ण है। इस पुल की लंबाई 1037 मीटर है और इसमें 17 स्पैन हैं। विशेष रूप से, इस पुल का फाउंडेशन डबल लाइन के अनुरूप तैयार किया गया है, जिससे भविष्य में चौथी लाइन निर्माण के समय अतिरिक्त फाउंडेशन की आवश्यकता नहीं होगी। यह समय, संसाधन और धन की बचत करेगा। पहले इस क्षेत्र में एल्गिन ब्रिज के नाम से जाना जाने वाला पुल था, जिसका निर्माण 1898 में हुआ था। बाद में 1981 में आमान परिवर्तन के दौरान इसे बड़ी लाइन के मानक के अनुरूप बनाया गया। दूसरा पुल 2012-13 में दोहरीकरण के दौरान बना था। तीसरा पुल अब कमीशनिंग के लिए तैयार है।

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