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बांके बिहारी मंदिर के चबूतरे से अतिक्रमण हटेगा, सेवायतों की भूमिका बनी चुनौती

By Dec 1, 2025

ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर की उच्चाधिकार प्रबंधन समिति ने मंदिर परिसर के चबूतरे से दुकानों के अतिक्रमण को हटाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। इस योजना के तहत, समिति ने पहले अपने ही जूताघर को हटाकर दुकानदारों को स्पष्ट संदेश दिया है। हालाँकि, दुकानों को हटाने का निर्णय आगामी 15 दिसंबर को होने वाली बैठक में लिया जाएगा, लेकिन इस कवायद ने दुकानदारों के बीच खलबली मचा दी है।nnnदुकानदारों को इस बात का भरोसा है कि मंदिर के सेवायतों का उन्हें समर्थन प्राप्त है, विशेषकर प्रवेश द्वार संख्या दो की चौखंडी पर स्थित सेवायत की गद्दी से। यह गद्दी सबसे अधिक अतिक्रमण का कारण बन रही है और इसका स्वामित्व मंदिर के एक सेवायत सदस्य के पास है। सूत्रों के अनुसार, यह गद्दी दशकों से बहुत ही कम किराए पर संचालित हो रही है। इसी तरह, चबूतरे पर मौजूद अन्य दुकानें भी मंदिर के सेवायतों की ही हैं, जिनके लिए भी कम किराया निर्धारित है। इस स्थिति में, चबूतरे से इन दुकानों को हटाना प्रबंधन समिति के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगा।nnnमंदिर के एक सेवायत सदस्य दिनेश गोस्वामी ने बताया कि प्रवेश द्वार संख्या दो की चौखंडी पर सेवायत सदस्य श्रीवर्धन गोस्वामी की गद्दी का अतिक्रमण दुकान से दोगुना हो चुका है। इस गद्दी के आवंटन का इतिहास भी रोचक है। बताया जाता है कि साठ के दशक में प्रबंध कमेटी के सदस्य कृष्णचंद्र गोस्वामी ने यह चौखंडी जयगोपाल गोस्वामी को इत्र की दुकान के लिए आवंटित की थी। बाद में यह दुकान जयगोपाल गोस्वामी के तीन पुत्रों को वसीयत में मिली। हालांकि, 90 के दशक में तत्कालीन अध्यक्ष आनंद गोस्वामी ने इस दुकान को खाली कराकर अपने लिए गद्दी बना ली। इसके बाद आनंद बिहारी गोस्वामी और जुगलकिशोर गोस्वामी ने इसका उपयोग किया, और वर्तमान में श्रीवर्धन गोस्वामी इसका उपयोग कर रहे हैं।nnnयह भी उल्लेखनीय है कि चबूतरे पर सबसे अधिक अतिक्रमण इसी गद्दी का है। इसके अलावा, गेट के दूसरी चौखंडी की एक दुकान रूपकिशोर गोस्वामी के नाम से मात्र तीन रुपये के किराए पर आवंटित हुई थी। इसी प्रकार, गेट संख्या तीन की ओर जाने वाले रास्ते पर एक खोखे में दुकान बनी है, जिसका संचालन अब गोपीवल्लभ गोस्वामी उर्फ गुपिया गोस्वामी और किशन बिहारी गोस्वामी के बेटे पंकज कर रहे हैं।nnnयह स्पष्ट है कि चबूतरे पर अतिक्रमण का एक बड़ा हिस्सा मंदिर के सेवायतों का ही है। इसे हटाना प्रबंध समिति के लिए एक कठिन कार्य होगा, खासकर तब जब समिति गोस्वामी समाज से दर्शन समय में वृद्धि या सेवायतों की संख्या तय करवाने में भी अब तक सफल नहीं हो पाई है।”
हो पाई है।

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