बांका में पंचायत चुनाव की गहमागहमी तेज, पंचायतों की संख्या में हुई कमी
बांका जिले में अगले साल 2026 में होने वाले पंचायत चुनाव को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं, जिससे चुनावी माहौल में हलचल तेज हो गई है। इस बार पंचायत चुनावों में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेगा, क्योंकि जिले में पंचायतों की कुल संख्या 185 से घटकर 182 हो गई है। सूत्रों के अनुसार, तीन पंचायतों को बौंसी और कटोरिया नगर पंचायत में शामिल कर लिया गया है, जिसके परिणामस्वरूप मुखिया और सरपंच के पदों की संख्या भी कम हो गई है।
अब पूरे जिले में 182 मुखिया और सरपंच के पदों के लिए चुनाव होंगे। इसके अतिरिक्त, पंच और वार्ड सदस्यों के लिए कुल 2417 पदों पर भी चुनाव होने हैं। चुनावी जानकारों का कहना है कि इस बार का पंचायत चुनाव नए परिसीमन और आरक्षण रोस्टर के आधार पर संपन्न कराया जाएगा। हालांकि, राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, और न ही चुनाव की तैयारियों को लेकर कोई पत्र प्राप्त हुआ है।
इन औपचारिकताओं के पूरा होने से पहले ही, गांवों में चुनावी सरगर्मी शुरू हो गई है। संभावित उम्मीदवार, जिनमें मुखिया, सरपंच और अन्य पदों के दावेदार शामिल हैं, अपने-अपने क्षेत्रों में जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। सुबह और शाम को गांवों की गलियों में संभावित प्रत्याशियों की चहल-पहल देखी जा सकती है, और उनके द्वारा विभिन्न स्थानों पर बैठकें आयोजित की जा रही हैं। पंचायतों के चौक-चौराहों पर भी चुनावी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है, जहाँ ग्रामीण विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।
आगामी पंचायत चुनावों के लिए सबसे पहले नए परिसीमन के तहत क्षेत्रों का निर्धारण किया जाएगा। इस प्रक्रिया से कई पदों के चुनावी क्षेत्रों का नक्शा बदल सकता है। इसके साथ ही, आरक्षण रोस्टर में भी बदलाव की संभावना है, जो बिहार सरकार द्वारा लागू नियमों के अनुसार तय होगा। चुनावी तैयारी के क्रम में, मतदाता सूची को अद्यतन किया जाएगा और बूथ स्तर पर मतदाताओं का विखंडन कर नई सूची तैयार की जाएगी। पिछले पंचायत चुनावों से जुड़े कुछ घटनाक्रमों, जैसे कि मधेपुरा में निर्विरोध चुने गए पंच अभ्यर्थियों और बांका में नाम वापस लेने वाले मुखिया प्रत्याशियों, ने भी चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया था।
