बाल सुरक्षा सप्ताह: किशोरावस्था में हार्मोनल बदलाव और मानसिक स्वास्थ्य
किशोरावस्था एक संवेदनशील पड़ाव है, जिसमें बच्चों को शारीरिक और मानसिक दोनों तरह के बदलावों का सामना करना पड़ता है। इस दौरान, हार्मोनल बदलाव तेजी से होते हैं, जिससे चिंता और तनाव की समस्या बढ़ सकती है। बाल सुरक्षा सप्ताह के दौरान, विशेषज्ञों ने किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित किया और उन्हें इस दौर में आने वाली चुनौतियों से निपटने के तरीके बताए।
सूत्रों के अनुसार, काउंसलरों ने बच्चों को सलाह दी कि वे अपनी समस्याओं को माता-पिता और विश्वसनीय वयस्कों के साथ साझा करें। उन्होंने बच्चों को सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने और स्वस्थ जीवनशैली जीने के लिए प्रेरित किया। काउंसलरों ने इस बात पर भी जोर दिया कि आवश्यकता पड़ने पर मनोवैज्ञानिक सहायता लेने में संकोच न करें।
धनबाद के एक युवा मैत्री केंद्र की काउंसलर रानी प्रसाद ने बताया कि किशोरावस्था में बच्चों को उनके बाल अधिकार, सुरक्षा, लैंगिक समानता और मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूक होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि किशोरों को अपनी समस्याओं और जिज्ञासाओं को अपनी मां के साथ साझा करना चाहिए। प्रसाद ने यह भी बताया कि युवा मैत्री केंद्र राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत किशोरों को सेवाएं प्रदान कर रहा है।
कार्यशाला में सोशल मीडिया के सकारात्मक उपयोग और किसी भी प्रकार की हिंसा या दुर्व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाने पर भी जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने किशोरों को संतुलित आहार लेने के लिए प्रोत्साहित किया, खासकर किशोरियों को, क्योंकि यह उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।
बाल सुरक्षा सप्ताह 14 से 20 नवंबर तक मनाया गया, जिसमें शिक्षा विभाग ने भी सहयोग दिया। इस दौरान विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें किशोरों को किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक परिवर्तनों, मानसिक तनाव और एनीमिया जैसी समस्याओं के बारे में जानकारी दी गई। इस पहल का उद्देश्य किशोरों को सशक्त बनाना और उन्हें एक स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य के लिए तैयार करना है।
