Australian Open 2026: पर्दे के पीछे की वो टीम जो बुनती है टेनिस सुपरस्टार्स की जीत की डोर
टेनिस के खेल में जब खिलाड़ी कोर्ट पर उतरता है, तो उसकी जीत का सबसे बड़ा हथियार उसका रैकेट होता है। लेकिन रैकेट की ताकत उसकी डोरियों (strings) में छिपी होती है। ऑस्ट्रेलियन ओपन 2026 में, जहां रोजर फेडरर और राफेल नडाल जैसे दिग्गजों ने इतिहास रचा है, वहीं मौजूदा समय में भी हर खिलाड़ी अपने रैकेट की डोरियों पर पूरा भरोसा करता है।
मेलबर्न पार्क में चल रहे साल के पहले ग्रैंड स्लैम Australian Open में, योनैक्स की 22 सदस्यीय स्ट्रिंगिंग टीम दिन-रात काम कर रही है। यह टीम दुनिया के शीर्ष 800 खिलाड़ियों के रैकेट को तैयार करती है। टीम के सदस्य बताते हैं कि हर खिलाड़ी की जरूरत अलग होती है, लेकिन सबसे बड़ा फैक्टर मौसम है। जब तापमान बढ़ता है, तो गेंद हवा में तेज चलती है, जिससे खिलाड़ियों को कंट्रोल बनाए रखने के लिए डोरियों का खिंचाव बढ़ाना पड़ता है।
रॉड लेवर एरीना में यह प्रक्रिया बेहद सटीक होती है। खिलाड़ी या कोच अपनी पसंद की स्ट्रिंग और जरूरी टेंशन की जानकारी देते हैं। इसके बाद रैकेट को बैक रूम में भेजा जाता है, जहां पुरानी डोरियां काटकर निकाली जाती हैं और फ्रेम को नए सिरे से तैयार किया जाता है। शीर्ष-10 खिलाड़ियों के रैकेट की जिम्मेदारी सबसे अनुभवी स्ट्रिंगर्स को दी जाती है, ताकि पूरे टूर्नामेंट में कंसिस्टेंसी बनी रहे।
एक समय था जब रैकेट की डोरियां जानवरों की आंतों से बनती थीं, जिसे ‘नेचुरल गट’ कहा जाता था। 1970 के दशक तक इसका ही राज था। लेकिन 1990 के दशक में पॉलिएस्टर ने एंट्री मारी। इससे खिलाड़ियों को ज्यादा स्पिन और ताकत तो मिली, लेकिन इसका भारी असर उनकी कलाई, कोहनी और कंधों पर भी पड़ा।
