उत्तर प्रदेश के कलेक्ट्रेट में आत्मदाह का प्रयास, प्रशासन पर सवाल | UP News
उत्तर प्रदेश के कानपुर और बागपत जिलों में कलेक्ट्रेट परिसरों में आत्मदाह के प्रयास की दो घटनाओं ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अपनी समस्याओं का समाधान न होने से निराश होकर पीड़ितों ने यह चरम कदम उठाने की कोशिश की। इन घटनाओं ने एक बार फिर यह दर्शाया है कि जब लोगों की शिकायतों का समय पर समाधान नहीं होता, तो वे आत्मदाह जैसे खतरनाक कदम उठाने को मजबूर हो जाते हैं।
कानपुर में जमीन विवाद को लेकर आत्मदाह का प्रयास
कानपुर कलेक्ट्रेट में सुबह करीब 10 बजे कानपुर देहात के मैथा क्षेत्र निवासी पदम सिंह और मोती सिंह नामक दो सगे भाइयों ने अपने ऊपर डीजल डालकर आत्मदाह करने का प्रयास किया। इस घटना से परिसर में अफरा-तफरी मच गई। सुरक्षा गार्डों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों को रोका और उनके हाथ से डीजल की पिपिया छीन ली। सूचना मिलने पर पुलिस बल मौके पर पहुंचा और दोनों भाइयों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई। भाइयों का आरोप है कि नौबस्ता के आवास विकास क्षेत्र में उनकी करीब सात बीघा पुस्तैनी जमीन पर दबंगों ने कब्जा कर लिया है और आवास विकास विभाग भी इसमें शामिल है। उन्होंने यह भी बताया कि कई बार अधिकारियों से शिकायत करने और मुख्यमंत्री पोर्टल पर गुहार लगाने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। जिलाधिकारी ने भी दोनों से बातचीत कर मामले की जानकारी ली और जांच के निर्देश दिए हैं।
बागपत में दुष्कर्म के आरोपी पर कार्रवाई न होने से आक्रोश
इसी तरह की दूसरी घटना बागपत कलेक्ट्रेट में सामने आई। यहां बिलोचपुरा गांव का एक पीड़ित परिवार बेटी से दुष्कर्म के आरोपी पर कार्रवाई न होने से आक्रोशित होकर कलेक्ट्रेट पहुंचा। परिवार के पांच सदस्यों ने आत्मदाह की चेतावनी देते हुए अपने ऊपर पेट्रोल उड़ेल लिया, जिससे परिसर में हड़कंप मच गया। मौके पर मौजूद एक अधिकारी ने तत्काल हस्तक्षेप कर महिलाओं से पेट्रोल की बोतल छीन ली और एक बड़ी घटना होने से बचा लिया। सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और सभी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी। परिजनों का आरोप है कि करीब एक माह पहले उनकी बेटी लापता हो गई थी, जिसकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी। बाद में उन्होंने एक चिकित्सक पर युवती के साथ दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की, लेकिन पुलिस द्वारा ठोस कदम न उठाए जाने से नाराज होकर उन्होंने यह कदम उठाया।
इन दोनों UP News घटनाओं ने प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाए हैं और यह उजागर किया है कि जनता की शिकायतों के त्वरित और प्रभावी निवारण की आवश्यकता कितनी महत्वपूर्ण है। प्रशासन ने दोनों मामलों में जांच का भरोसा दिलाया है और पीड़ितों को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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