अमेरिका का पाकिस्तान में बड़ा दांव: बलूचिस्तान के रेको डिक में 1.25 अरब डॉलर का निवेश, क्या है खतरा?
अमेरिका ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में 1.25 अरब डॉलर का निवेश करने का फैसला किया है। यह निवेश रेको डिक खदान परियोजना के लिए है, जो दुनिया के सबसे बड़े तांबा और सोने के भंडार में से एक है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख और प्रधानमंत्री ने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की थी और उन्हें दुर्लभ खनिज नमूनों का प्रदर्शन किया था। हालांकि, यह निवेश एक उच्च जोखिम वाला दांव माना जा रहा है।
रेको डिक खदान बलूचिस्तान के अशांत चगाई जिले में स्थित है, जो अफगानिस्तान और ईरान की सीमा से सटा हुआ है। यह क्षेत्र लंबे समय से अलगाववादी हिंसा और विद्रोह का केंद्र रहा है। बलूच राष्ट्रवादी समूह लगातार सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर हमला करते रहे हैं। इस कारण यह खदान परियोजना दशकों से निष्क्रिय पड़ी थी।
यूएस चार्ज डी’अफेयर्स नताली बेकर ने एक्स पर एक वीडियो संदेश में कहा कि यूएस एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक (EXIM बैंक) ने रेको डिक में महत्वपूर्ण खनिजों के खनन का समर्थन करने के लिए वित्तपोषण को मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि इससे अमेरिका में 6,000 और बलूचिस्तान में 7,500 नौकरियां पैदा होंगी।
लेकिन इस निवेश के समय और पैमाने पर सवाल उठ रहे हैं। बलूच नेशनल मूवमेंट के अध्यक्ष नसीम बलूच ने कहा, “रेको डिक पाकिस्तान के लिए ‘अच्छी खबर’ नहीं है। ये संसाधन पाकिस्तान के नहीं, बल्कि बलूच लोगों के हैं। कोई भी देश या कंपनी जो इस परियोजना में निवेश करती है, वह सीधे तौर पर बलूचिस्तान के शोषण को सक्षम कर रही है। बलूच लोगों की सहमति के बिना बलूच भूमि पर कोई भी परियोजना स्वीकार्य परियोजना स्वीकार्य नहीं है।”
वैश्विक खनन दिग्गज बैरिक ने इस परियोजना के लिए प्रतिबद्धता जताई है और 2028 के अंत तक उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है, लेकिन सुरक्षा चुनौतियों के कारण उसे वर्षों से संघर्ष करना पड़ रहा है।
