ऐश्वर्या राय ने बताया- क्यों रहती हैं इंटरनेट से दूर? ‘धोखा मत दो…’ ऐसी जिंदगी जीना पसंद करती हैं Aishwarya Rai
ऐश्वर्या राय उन सितारों में शुमार हैं जो स्टारडम को खुद पर हावी नहीं होने देती हैं। मिस वर्ल्ड का खिताब जीतने वालीं ऐश्वर्या ने मन के मुताबिक अपनी जिंदगी जीना पसंद किया है।
स्टार बन जाने के बाद सितारों से कई तरह की उम्मीदें होती हैं कि वह फलां तरीके की फिल्में करेंगे, इंटरनेट मीडिया पर उनकी मौजूदगी फलां तरीके की होगी। हालांकि अभिनेत्री ऐश्वर्या राय इन सबसे परे अपनी जिंदगी बिताना पसंद करती हैं। ऐश्वर्या राय न केवल अपने इंटरनेट मीडिया, बल्कि अपनी फिल्मों की पसंद से यह बताना चाहती हैं कि खुद को साबित करने के लिए किसी मान्यता की जरूरत नहीं होती है। सऊदी अरब के जेद्दा में चल रहे पांचवें रेड सी फेस्टिवल के ओपनिंग समारोह में यह बातें ऐश्वर्या ने अपनी मास्टरक्लास के दौरान कहीं।
साल 1994 में विश्व सुंदरी बनी ऐश्वर्या ने कभी इस खिताब को ब्यूटी पैजेंट की तरह नहीं देखा। वह कहती हैं कि मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता का हिस्सा बनना एक संयोग था। इसे कभी किसी ब्यूटी पेजेंट की तरह नहीं देखा। मैंने इसे एक ऐसे अवसर की तरह देखा, जिसमें मैं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय महिला का प्रतिनिधित्व कर सकूं। मैं हैरान थी यह जानकर कि दुनिया का एक बड़ा हिस्सा भारतीय लोगों या भारतीय महिला के बारे में कितना कम जानता था। कई लोग तो यह तक सोचते थे कि हम बाघों और सांप की जमीन से आते हैं। मैंने उस खिताब के जरिए हमें विदेश में सही रूप में पेश करने की कोशिश की है।
प्रसिद्धि मिलने के बावजूद ऐश्वर्या कभी इनसिक्योर नहीं हुईं। मणि रत्नम निर्देशित तमिल फिल्म इरुवर से अपने अभिनय करियर की शुरुआत करने वाली ऐश्वर्या इसे लेकर कहती हैं कि असुरक्षा वाली भावनाएं कभी भी मेरे लिए प्रेरक शक्ति नहीं रही हैं। ऐसा कई बार होता है कि आसपास की आवाजें, आपके दिमाग में जाती हैं। उससे आपके फैसले भी प्रभावित हो सकते हैं। लेकिन इसने मेरे फैसलों को नहीं बदला।
मुझे आज भी याद है कि मणि रत्नम (निर्देशक) ने मुझे इरुवर देते हुए कहा था कि यह तुम्हारी कोई लॉन्च फिल्म नहीं है। यह बस एक फिल्म है, एक कहानी है। मैंने सोचा, वाह, यही वह फिल्म है, जो मैं करना चाहती हूं। मैंने चोखेर बाली फिल्म भी की थी, वो भी देवदास फिल्म के बाद शिखर पर पहुंचने पर। मैंने यही सोचा था कि खूबसूरत कहानी है, इसलिए करनी चाहिए। मुझे आपका (फिल्म इंडस्ट्री का) प्यार मिला है, सपोर्ट मिला है। हमारे पास टैंलेंट से भरपूर इंडस्ट्री है, जो मुझसे ना सुनने के लिए भी तैयार रहती है, जब मुझे कोई स्क्रिप्ट पसंद नहीं आती।
