एयरबस ने Google-Microsoft से बनाई दूरी, CLOUD Act के डर से यूरोपीय क्लाउड की ओर बढ़ा कदम
यूरोप की सबसे बड़ी एयरोस्पेस कंपनी एयरबस, अमेरिकी टेक दिग्गजों गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न वेब सर्विसेज (AWS) से दूरी बनाने की तैयारी में है। कंपनी अपने मिशन-क्रिटिकल डेटा और एप्लिकेशंस को यूरोपीय ‘संप्रभु क्लाउड’ पर स्थानांतरित करने के लिए एक बड़ा टेंडर जारी करने वाली है। इस फैसले के पीछे अमेरिकी CLOUD Act का डर बताया जा रहा है, जो अमेरिकी सरकार को विदेशी सर्वरों पर भी अमेरिकी कंपनियों के डेटा तक पहुंच की अनुमति देता है।
एयरबस की कार्यकारी उपाध्यक्ष कैथरीन जेस्टिन ने राष्ट्रीय और यूरोपीय दृष्टिकोण से संवेदनशील जानकारी के लिए एक संप्रभु क्लाउड की आवश्यकता पर जोर दिया, जो पूरी तरह यूरोपीय नियंत्रण में रहे। वर्तमान में गूगल वर्कस्पेस और माइक्रोसॉफ्ट के कुछ सॉफ्टवेयर का उपयोग करने वाली एयरबस, अब ERP, मैन्युफैक्चरिंग एग्जीक्यूशन सिस्टम, CRM और प्रोडक्ट लाइफसाइकिल मैनेजमेंट जैसे महत्वपूर्ण एप्लिकेशंस को क्लाउड पर ले जाने की योजना बना रही है। यह अनुबंध 50 मिलियन यूरो से अधिक का हो सकता है और 10 साल तक चल सकता है।
डिजिटल संप्रभुता, यानी किसी राष्ट्र की अपने डिजिटल भविष्य पर अंतिम निर्णय लेने की क्षमता, का मुद्दा अमेरिका में ट्रंप की संभावित वापसी के बाद और गंभीर हो गया है। CLOUD Act, 2018 में पारित होने के बाद से अमेरिकी कंपनियों को वारंट या सम्मन के माध्यम से विदेशी सर्वरों पर संग्रहीत डेटा तक पहुंचने का अधिकार देता है, भले ही वह डेटा किसी अन्य देश में हो। यह स्थिति डेटा संप्रभुता को लेकर वैश्विक चिंताएं बढ़ा रही है।
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