स्मार्ट मीटर लगने के बाद पूर्वांचल में बढ़ा बिजली बिल, राजस्व में 31% की वृद्धि, उपभोक्ता परिषद ने उठाए सवाल | UP Electricity News
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के 23 लाख से अधिक उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगने के बाद बिजली बिलों में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है। इन मीटरों के लगने के बाद निगम का राजस्व 212 करोड़ रुपये से बढ़कर 278 करोड़ रुपये हो गया है, जो 31% से अधिक की वृद्धि है। यह मामला राज्य स्तर पर उपभोक्ताओं के बीच चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि बिजली बिलों में 2% रियायत के नियम के बावजूद राजस्व में इतनी बड़ी उछाल आई है।
यह वृद्धि तब सामने आई है जब पावर कॉरपोरेशन ने स्मार्ट मीटर लगाने का खर्च उपभोक्ताओं से बिजली दरों में वसूलने का प्रस्ताव नियामक आयोग में दिया था। आयोग ने कॉरपोरेशन से स्मार्ट मीटरों पर विस्तृत जवाब मांगा था, जिसमें राजस्व संग्रह के अंतर का सवाल भी शामिल था। बिजली कंपनियों ने आयोग में अपना जवाब दाखिल किया है।
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम ने बताया कि उसके क्षेत्र में 23,32,629 स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं। वर्ष 2024 की तुलना में, जब स्मार्ट मीटर नहीं लगे थे, वर्ष 2025 में स्मार्ट मीटर लगने के बाद 31.19% अधिक बिल जमा किया गया। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में पूर्वांचल ने ₹212.22 करोड़ रुपये जमा किए थे, जबकि वर्ष 2025 में यह बढ़कर ₹278.41 करोड़ रुपये हो गया।
राजस्व में तिमाही वृद्धि
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के त्रैमासिक राजस्व विवरण (करोड़ रुपये में) के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही में 32.80%, जुलाई-सितंबर में 22.78%, अक्टूबर-दिसंबर में 36.64% और जनवरी-मार्च में 29.75% की वृद्धि दर्ज की गई है। कुल मिलाकर, यह वृद्धि 31.19% रही है।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष और राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने इन आंकड़ों पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह सिद्ध हो गया है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगने के बाद उपभोक्ताओं की रीडिंग में अंतर आ रहा है। उनका मानना है कि सभी बिजली कंपनियों में आठ से लेकर 15% तक रीडिंग बढ़ना स्वाभाविक है। वर्मा ने कहा कि पूर्वांचल के आंकड़ों से यह स्पष्ट हो गया है कि या तो पहले के मीटरों में कमी थी या अब जो स्मार्ट मीटर लग रहे हैं, उनमें कोई तकनीकी खामी है। उन्होंने इसकी गहन जांच की मांग की है।
पूर्वांचल में इन्हीं 23 लाख उपभोक्ताओं की कुल रीडिंग वर्ष 2024 में 3874 थी, जो स्मार्ट मीटर लगने के बाद वर्ष 2025 में बढ़कर 4187 हो गई। यह लगभग आठ प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाती है। इस वृद्धि का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है, जिससे उनकी मासिक बिजली लागत में इजाफा हो रहा है।
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