सरकारी स्कूलों में आवारा कुत्तों पर एक्शन, प्रिंसिपल पर होगी कार्रवाई: Bihar SOP जारी
बिहार शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में आवारा कुत्तों के प्रवेश को रोकने के लिए एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद यह कदम उठाया गया है, जिसका उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
नई एसओपी के अनुसार, यदि किसी स्कूल में मिड डे मील के अपशिष्ट या जूठन के कारण आवारा कुत्ते पाए जाते हैं, तो इसके लिए केवल रसोइया ही नहीं, बल्कि प्रधानाध्यापक, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी को भी संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा। प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में जिलों को पत्र भेजकर तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया है। विभाग का मानना है कि आवारा कुत्तों का स्कूल में घुसना बच्चों के जीवन के अधिकार का उल्लंघन है और इसमें लापरवाही को सुप्रीम कोर्ट की अवमानना माना जाएगा।
विभाग ने स्वीकार किया है कि स्कूलों में कुत्तों के आने का मुख्य कारण मिड डे मील का बचा हुआ खाना और अपर्याप्त सफाई है। नई गाइडलाइन के तहत, बच्चों के खाना खाने के 15-20 मिनट के भीतर क्लासरूम, बरामदा और हाथ धोने की जगह की सफाई अनिवार्य कर दी गई है। जूठन या खाद्य अपशिष्ट को खुले में फेंकने पर पूरी तरह पाबंदी है और इसे ढक्कनदार डिब्बों में रखकर स्कूल परिसर के बाहर निर्धारित स्थान पर ही निपटाना होगा।
इसके अतिरिक्त, स्कूल परिसर के भीतर किसी भी हाल में कुत्तों को खाना खिलाने पर रोक लगा दी गई है। स्कूलों को अपने प्रवेश द्वार पर यह सूचना बोर्ड लगाना होगा कि विद्यालय परिसर में भटकते कुत्तों को भोजन देना प्रतिबंधित है। साथ ही, रसोई घर के चारों ओर जाली या फेंसिंग लगाने का निर्देश दिया गया है ताकि भोजन की गंध से कुत्ते आकर्षित न हों। यह व्यवस्था बच्चों को आवारा कुत्तों से सुरक्षित रखने और एक स्वच्छ शैक्षणिक वातावरण प्रदान करने के लिए की गई है।
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