13 साल पहले मृत घोषित व्यक्ति स्कूटर चलाते हुए मिला, कोर्ट ने दिया गिरफ्तारी का आदेश | Agra crime news
आगरा में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां धोखाधड़ी के एक आरोपित को कोर्ट ने 13 साल पहले मृत मानकर केस बंद कर दिया था। अब वही व्यक्ति शहर की सड़कों पर स्कूटर चलाते हुए जिंदा पकड़ा गया है। वादी पक्ष ने आरोपित को गांधी नगर इलाके में देखा और उसकी तस्वीर खींचकर कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश की। कोर्ट ने इस गंभीर धोखाधड़ी पर संज्ञान लेते हुए आरोपित को तुरंत गिरफ्तार करने का आदेश दिया है।
यह मामला अप्रैल 1999 में शुरू हुआ था, जब मदनगोपाल ने ताराचंद शर्मा और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया था। अन्य आरोपितों की मौत के बाद मामला सिर्फ ताराचंद पर रह गया था। जब 2011 में कोर्ट ने कुर्की का नोटिस जारी किया, तो आरोपित पक्ष ने ताराचंद का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र पेश कर दिया। पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने उसे मृत मानकर केस निरस्त कर दिया था।
नवंबर 2025 में वादी के पुत्र ने ताराचंद को गांधी नगर में स्कूटर चलाते देखा। वादी पक्ष ने तुरंत जांच की, जिसमें पता चला कि आरोपित ने 2019 में अपने नाम पर स्कूटर खरीदा था। इसके अलावा, वह बैंक खाते और डिजिटल भुगतान (पेटीएम) का भी उपयोग कर रहा था। यह स्पष्ट हो गया कि आरोपित ने कोर्ट को धोखा देने के लिए फर्जी प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया था।
अधिवक्ता समीर भटनागर के अनुसार, कोर्ट ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने न्यू आगरा पुलिस को आरोपित ताराचंद शर्मा को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है। इस घटना ने कानूनी प्रक्रिया में फर्जीवाड़े के गंभीर परिणामों को उजागर किया है।
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