बीएमसी चुनाव: मुंबई की लड़ाई, राष्ट्रीय दांव पर क्यों?
बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (बीएमसी) के चुनाव की घोषणा का इंतजार पूरे देश को है। हालांकि ये चुनाव मुंबई शहर और उसके आसपास के इलाकों के लिए स्थानीय मुद्दों पर होने हैं, लेकिन इनकी राजनीति, वित्तीय दांव और राजनीतिक संदेशों ने इन्हें राष्ट्रीय महत्व का विषय बना दिया है। तीन साल के अंतराल के बाद हो रहे इन चुनावों पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
पिछली बार 2017 में स्थानीय निकाय चुनाव हुए थे, लेकिन वार्डों के परिसीमन और आरक्षण संबंधी मुद्दों के कारण इनमें देरी हुई। सुप्रीम कोर्ट ने इस साल सितंबर में निर्देश दिया था कि स्थानीय निकाय चुनाव 31 जनवरी तक हर हाल में संपन्न कराए जाएं। बीएमसी का अनुमानित बजट लगभग 75,000 करोड़ रुपये है, जो इसे एशिया के सबसे अमीर नागरिक निकायों में से एक बनाता है। यह राशि बेंगलुरु की नागरिक निकाय के वार्षिक बजट से लगभग चार गुना है।
बीएमसी 483 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैले 1.3 करोड़ से अधिक लोगों को सेवाएं प्रदान करता है। यह दक्षिण मुंबई के पॉश इलाकों से लेकर बांद्रा, जुहू, दहिसर और देवनार जैसे दूर-दराज के उपनगरों तक पूरे शहर को कवर करता है। इन चुनावों में विभिन्न राजनीतिक दल अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं, क्योंकि मुंबई का राजनीतिक परिदृश्य राष्ट्रीय राजनीति का एक महत्वपूर्ण प्रतिबिंब माना जाता है।
यह चुनाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शिवसेना में हालिया विभाजन के बाद हो रहा है। पहले इस निकाय पर शिवसेना का वर्चस्व था। 2017 में, अविभाजित शिवसेना ने 84 सीटें जीती थीं, जबकि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट के पास सबसे ज्यादा कॉर्पोरेटर थे। इस बार, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाला शिवसेना गुट और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) भी चुनावी दौड़ में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) लंबे समय से बीएमसी पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रही है, और यह पार्टी नेतृत्व के लिए एक प्रमुख एजेंडा रहा है। 2017 में, भाजपा 82 सीटें जीतकर बहुत करीब पहुंच गई थी, लेकिन मेयर का पद शिवसेना के पास चला गया था। इस बार, भाजपा यह सुनिश्चित करना चाहती है कि वह सबसे ज्यादा कॉर्पोरेटर सीटें जीतकर बोर्ड पर कब्जा करे। शिवसेना में विभाजन के बाद, मुंबई का नियंत्रण किसके पास जाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा, क्योंकि यह महाराष्ट्र की राजनीति और राष्ट्रीय स्तर पर भी एक बड़ा संदेश देगा।
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