मानेसर में छात्राओं की जान जोखिम में, हाईवे पार करने को मजबूर, फुटओवर ब्रिज की मांग तेज
दिल्ली-जयपुर हाईवे पर स्थित मानेसर गांव में स्कूली छात्राओं को हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर हाईवे पार करना पड़ रहा है। गांव की बसावट हाईवे के एक तरफ है, जबकि सरकारी स्कूल दूसरी तरफ। इस कारण छात्रों को व्यस्त हाईवे से पैदल गुजरना पड़ता है, जो किसी बड़े हादसे को निमंत्रण दे सकता है।
गांव में एक अंडरपास का निर्माण किया गया है, लेकिन उसकी स्थिति बेहद खराब है। अंडरपास के दोनों तरफ गंदा पानी जमा रहता है और वाहनों की आवाजाही के कारण अक्सर जाम लगा रहता है। इस वजह से छात्र और अन्य राहगीर इसका उपयोग करने से कतराते हैं। इसके विकल्प के तौर पर, मानेसर में एक फुटओवर ब्रिज बनाने की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन इस पर अब तक कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
दिल्ली-जयपुर हाईवे पर रोजाना करीब 80 हजार वाहनों का आवागमन होता है। जब छात्र और अन्य लोग पैदल सड़क पार करने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें रुकना पड़ता है, जिससे एनएसजी कैंप तक लंबा जाम लग जाता है। शाम के समय औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिक भी इसी रास्ते से गुजरते हैं, जिससे आइएमटी चौक तक जाम की स्थिति बन जाती है।
आने वाले समय में कोहरे और धुंध के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो सकती है। ऐसे में वाहन चालकों को कम दिखाई देता है, जिससे स्कूली बच्चों के लिए सड़क पार करना और भी खतरनाक हो जाएगा। गांव के पूर्व सरपंच ओमप्रकाश यादव ने इस समस्या पर चिंता जताते हुए कहा कि गांव के बीचों-बीच गुजर रहे हाईवे के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है।
ग्रामीणों की मानें तो यह समस्या केवल स्कूली छात्रों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों और गांव के अन्य निवासियों को भी हर दिन इस खतरे का सामना करना पड़ता है। इस कारण गांव में अक्सर यातायात जाम की स्थिति बनी रहती है।
वहीं, मानेसर के एसडीएम दर्शन यादव ने आश्वासन दिया है कि इस मामले को रोड सेफ्टी कमेटी की आगामी बैठक में प्रमुखता से उठाया जाएगा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
