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जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार का होगा डिजिटल मूल्यांकन, 104 करोड़ का अंतरिम बजट पास

By Nov 22, 2025

ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार में रखे अनमोल रत्नों और आभूषणों की अब डिजिटल गिनती की जाएगी। मंदिर प्रशासन ने इस महत्वपूर्ण पहल के लिए 104 करोड़ रुपये का अंतरिम बजट स्वीकृत किया है। गजपति महाराजा दिव्य सिंहदेव की अध्यक्षता में हुई पुरी जगन्नाथ प्रबंधन समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिसका उद्देश्य रत्नों की सही मात्रा और मूल्य का पता लगाकर पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

सूत्रों के अनुसार, यह कदम महाप्रभु के पवित्र भोग नीति, मकर संक्रांति नीति और नववर्ष पर भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए उठाया गया है। जिन दिनों मंदिर में अनुष्ठानिक गतिविधियां कम होंगी, उन दिनों रत्न भंडार में रखे कीमती रत्नों और आभूषणों की गिनती की जाएगी। इसके लिए एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की जा रही है।

नई एसओपी के तहत, प्रत्येक रत्न और आभूषण की डिजिटल इन्वेंट्री तैयार की जाएगी। इस प्रक्रिया में भारतीय रिजर्व बैंक के अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। हालांकि, रत्नों की गिनती एक बार में पूरी नहीं की जाएगी, बल्कि इसे विभिन्न चरणों में पूरा किया जाएगा ताकि महाप्रभु की दैनिक नीतियों और भक्तों के दर्शन में किसी भी प्रकार की बाधा न आए।

बैठक में कतार दर्शन व्यवस्था को लागू करने से पहले और अधिक अध्ययन करने का भी निर्णय लिया गया। नाटमंडप में बैरिकेड लगाकर कतार दर्शन की व्यवस्था की जाएगी, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इससे भक्तों के दर्शन में कोई व्यवधान न हो। बैरिकेड के डिजाइन में बदलाव के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) से परामर्श लिया जाएगा।

एमआर मठ से बरामद चांदी की ईंटों के मामले में, राज्य सरकार के एडवोकेट जनरल की सलाह लेकर उन्हें नियमों के अनुसार श्रीमंदिर रत्न भंडार के अधीन लाने की प्रक्रिया पर कदम उठाए जाएंगे।

वर्ष 2025-26 के लिए 104 करोड़ रुपये का अंतरिम बजट प्रस्तुत कर स्वीकृत किया गया। साथ ही, वित्तीय वर्ष 2022-23 और 2023-24 के ऑडिट की तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं। भविष्य में जगन्नाथ बल्लभ मल्टी-लेवल कार पार्किंग का संचालन श्रीमंदिर प्रशासन के अधीन आ जाएगा और जगन्नाथ बल्लभ प्रमोद उद्यान का आधुनिकीकरण भी किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त, पुरी के सभी बैंकों के एटीएम में श्रीमंदिर हुंडी में दान देने की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बैंकों से अनुरोध किया जाएगा। जल्द ही गुंडिचा मंदिर को भी भक्तों के लिए खोल दिया जाएगा और इसका संचालन मंदिर प्रशासन स्वयं करेगा, इसे नीलाम नहीं किया जाएगा।

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